बहराइच में 13 अक्टूबर 2024 को गोपाल मिश्रा की हत्या के के बाद भड़की हिंसा में गुरुवार को अदालत को फैसला आया है। कोर्ट ने मामले के दोषी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, आठ आरोपियों को आजीवन कारावास और एक को आठ वर्ष कैद की सजा हुई है। साथ ही एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था
मालूम हो कि मूर्ति विसर्जन के दौरान गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी और उसके बाद भडकी हिंसा से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। बुधवार को अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ रिंकू, उसके पिता अब्दुल हमीद, दो भाइयों फहीम और तालिब उर्फ सबलू सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। बृहस्पतिवार दोपहर बाद इन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। केस को लेकर कचहरी परिसर में सुबह से ही गहमागहमी रही।
यह वही घटनाक्रम है, जिसने दशहरे जैसे पावन पर्व पर पूरे जिले को हिंसा की आग में झोंक दिया था। पीएसी तैनात हुई, रैपिड एक्शन फोर्स को उतारा गया। डीएम-एसपी खुद डटीं। इसके बाद भी हालात नियंत्रित नहीं हुए। मुख्यमंत्री योगी ने हस्तक्षेप किया और यूपी एटीएस चीफ अमिताभ यश को जिम्मेदारी सौंपी, तब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने शुरू हुए।
13 महीने 26 दिन में आया फैसला
सनसनीखेज मामले में अदालत का फैसला 13 महीने 26 दिन में आया है। घटना 13 अक्तूबर 20025 की। राम गोपाल मिश्रा की मौत के बाद आज भी उनके घर में मातम छाया हुआ है। मां रोली मिश्रा पथराई आंखों से न्याय मिलने का इंतजार कर रही थीं। वहीं बेटे की मौत के सदसे में पिता कैलाश नाथ मिश्रा की तबियत खराब चल रही है और वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। बड़े बेटे हरमिलन मिश्र उनकी देखभाल में जुटे हैं। रामगोपाल की हत्या के बाद हरमिलन ही परिवार का सहारा हैं। बताते चलें कि घटना के दूसरे दिन एसओ सुरेश कुमार वर्मा और महसी चौकी इंचार्ज शिव कुमार सरोज को निलंबित कर दिया गया था। तीन दिन बाद सीओ रुपेंद्र गौड़ पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की गई थी।