COVID-19 Cases: एक बार फिर देश में कोरोना ने लोगों के जहन में डर पैदा कर दिया है. देश में कोरोना के एक्टीव केसों की संख्या 4000 के पार हो गई है. नए केसों में लगातार इजाफा हो रहा है. वहीं कोविड से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ी है. हालांकि विशेषज्ञ चिकित्सकों को मानना है कि डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. हां विभाग को तैयारी जरूर करनी चाहिए. इस कोरोना वायरस में फैलने की क्षमता है अधिक है. लेकिन यह उतना प्रभावी नहीं है. इसलिए इससे डरने की जरूरत नहीं है...
भारत में अभी कौन से वैरिएंट एक्टिव हैं?
यह नई लहर दो नए कोरोनावायरस वेरिएंट, एनबी.1.8.1 और एलएफ.7 के कारण आई है, जो ओमिक्रॉन जेएन.1 वेरिएंट के म्यूटेशन हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत गठित भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के आंकड़ों के अनुसार, दोनों भारत में पाए गए.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मोतीलाल नेहरू संयुक्त अस्पताल के मुख्य अधीक्षक डॉ. एस.के. चौधरी ने न्यूज एजेंसी IANS को बताया, " कोविड के मामले फिर से पॉजिटिव आ रहे हैं, घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. यह जेएन.1 वेरिएंट के कारण है, जो फिर से सामने आ रहा है." साल्वे ने कहा कि इन वेरिएंट के कारण गंभीर संक्रमण की संभावना नहीं है, क्योंकि अधिकांश आबादी में प्राकृतिक प्रतिरक्षा होती है. उन्होंने कहा, "लक्षण पहले के कोविड संक्रमणों के समान हैं. चूंकि अधिकांश आबादी पहले ही संक्रमित हो चुकी है, इसलिए उनके पास प्राकृतिक प्रतिरक्षा होती है, जो उन्हें बीमारी के गंभीर रूप से प्रकट होने से बचाती है."
क्या हमें घबराने की जरूरत है?
एम्स के पूर्व डायरेक्टर, डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि "नए वेरिएंट वेरियंट से डरने की कोई बात नहीं है. इस वेरियंट में केस जरूर बढ़े हैं, लेकिन यह गंभीर खतरा नहीं है. इस वेरियंट में दो बाते हैं, पहली कि यह वेरियंट इम्यून इवेजन कर रहा है. यानि कि इम्यून सिस्टम को इवेट कर के संक्रमण फैलाने के चांस इसमें ज्यादा हैं. दूसरा कि म्यूटेशन के कारण एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने की संभावना भी इस वायरस में थोड़ी सी ज्यादा है,,.