लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी और मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं पर सवाल उठाने वाली तस्वीर स्वास्थ्य विभाग की हालिया कार्रवाई से सामने आई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात 26 चिकित्सकों की सेवाएं लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और चिकित्सीय दायित्वों में लापरवाही के चलते समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा नौ डॉक्टरों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। बड़ी संख्या में चिकित्सकों के खिलाफ एक साथ हुई कार्रवाई से यह सवाल भी खड़ा हुआ है कि ये डॉक्टर लंबे समय तक अनुपस्थित रहे तो संबंधित अस्पतालों और जिलों के निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी समय पर क्यों नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का दायरा किसी एक मंडल या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बर्खास्त किए गए डॉक्टर फिरोजाबाद, अलीगढ़, गाजीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, लखनऊ, बलरामपुर और मथुरा समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात थे। इनमें स्त्री रोग, रेडियोलॉजी, ईएनटी, सर्जरी और सामान्य चिकित्सा से जुड़े चिकित्सक भी शामिल हैं। इसका सीधा असर उन सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ा, जहां पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर दबाव रहता है।
सबसे गंभीर सवाल जवाबदेही का है। किसी डॉक्टर का लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित रहना एक-दो दिन की प्रशासनिक चूक नहीं मानी जा सकती। इसके बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई विभागीय समीक्षा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद हुई। इससे यह पता चलता है कि अस्पताल स्तर से लेकर जिला स्वास्थ्य प्रशासन तक नियमित उपस्थिति की निगरानी में कहीं न कहीं खामी रही। यदि बायोमीट्रिक हाजिरी, निरीक्षण और चिकित्सकीय सेवाओं की नियमित समीक्षा प्रभावी होती तो लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों की पहचान पहले हो सकती थी।
मरीजों की अनदेखी का असर केवल अस्पताल की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाला गरीब और ग्रामीण तबका अक्सर निजी अस्पताल का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में डॉक्टर की अनुपस्थिति का मतलब कई बार मरीज का इलाज टलना, दूसरे केंद्र पर भेजा जाना या निजी चिकित्सा का खर्च उठाना होता है। खासकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले जिलों में एक डॉक्टर की अनुपस्थिति का असर और अधिक पड़ता है।
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को समय पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। ड्यूटी से गायब रहने या चिकित्सीय दायित्वों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग ने 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के साथ नौ अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हालांकि कार्रवाई के बाद अब असली परीक्षा निगरानी व्यवस्था की है। केवल अनुपस्थित डॉक्टरों पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग को यह भी तय करना होगा कि भविष्य में किसी चिकित्सक की लगातार गैरहाजिरी महीनों तक संबंधित अधिकारियों की नजर से बाहर न रहे। यदि नियमित उपस्थिति, निरीक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो बर्खास्तगी की ऐसी कार्रवाइयां व्यवस्था की बीमारी का इलाज करने के बजाय उसके सामने आने वाले मामलों की संख्या भर घटा पाएंगी।इसमें नकारात्मकता कार्रवाई में नहीं, बल्कि कार्रवाई से उजागर हुई व्यवस्था की कमजोरी में है। यही इसे महज “26 डॉक्टर बर्खास्त” वाली खबर से अलग बनाता है।