ED takes Major Action: अवैध रेत खनन और उससे जुड़े काले धन के नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। कोलकाता जोनल ऑफिस ने इस मामले में कई अहम कदम उठाते हुए अभियोजन शिकायत दाखिल की है और बड़ी संख्या में संपत्तियों को कुर्क किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा मामला संगठित तरीके से किए गए अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है।
किनके खिलाफ हुई कार्रवाई
ED ने अरुण सराफ, उनकी कंपनी जीडी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ PMLA, 2002 के तहत स्पेशल कोर्ट में शिकायत दर्ज की है। इसके साथ ही 2 जनवरी को 149 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 8.26 करोड़ रुपये है। ये संपत्तियां अलग-अलग ग्रुप कंपनियों के नाम पर दर्ज पाई गईं।
FIR से शुरू हुई जांच
यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इन मामलों में रेत की चोरी, अवैध खनन, भंडारण और परिवहन के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया कि रेत ढोने के लिए फर्जी और जाली ई-चालानों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे सरकारी नियमों को खुलेआम नजरअंदाज किया गया।
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फर्जीवाड़े का पूरा तरीका
ED की जांच में खुलासा हुआ कि एक ही चालान पर कई बार ट्रिप दिखाना, नकली ई-चालान बनाना और अवैध तरीके से रेत बेचकर करोड़ों की कमाई की गई। यह अवैध आय प्रोसीड्स ऑफ क्राइम के तौर पर सामने आई। छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए, जो इस पूरे खेल की पुष्टि करते हैं।
काले धन को सफेद बनाने की कोशिश
जांच एजेंसी के मुताबिक अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए खातों में हेरफेर, कैश डिपॉजिट और GST रिटर्न में बदलाव किए गए। इसी काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को अब कुर्क किया गया है। मामले में जीडी माइनिंग के प्रमोटर अरुण सराफ पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं और न्यायिक हिरासत में हैं। ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई संभव है।