Credit Card Limit Increase : फेस्टिव सीजन शुरू होते ही बाजार में खरीदारी का माहौल बन जाता है। इसी समय कई बैंक अपने ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का ऑफर भी देने लगते हैं। मोबाइल मैसेज, ईमेल और बैंकिंग ऐप के जरिए ग्राहकों को बताया जाता है कि वे बिना नए आवेदन के अपनी कार्ड लिमिट बढ़ा सकते हैं। हालांकि, यह फैसला पूरी तरह ग्राहक की सहमति पर निर्भर करता है। बैंक किसी भी ग्राहक की मंजूरी के बिना उसकी लिमिट नहीं बढ़ा सकता।
लिमिट बढ़ने का मतलब
क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ने का सीधा मतलब है कि आपके पास पहले से ज्यादा खर्च करने की सुविधा उपलब्ध हो जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक की लिमिट 50 हजार रुपये है और बैंक उसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर देता है, तो ग्राहक जरूरत पड़ने पर ज्यादा राशि का इस्तेमाल कर सकता है। खासकर आपात स्थिति में यह अतिरिक्त लिमिट मददगार साबित हो सकती है।
क्या हैं फायदे?
क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि उपलब्ध रहती है। इसके अलावा अगर ग्राहक समय पर बिल का भुगतान करता है, तो उसका सिबिल स्कोर बेहतर हो सकता है। लिमिट बढ़ने के बाद यदि खर्च पहले जैसा ही रहता है, तो क्रेडिट उपयोग अनुपात कम हो जाता है। वित्तीय विशेषज्ञ इसे अच्छी क्रेडिट प्रोफाइल का संकेत मानते हैं। साथ ही अधिक खर्च पर ज्यादा रिवॉर्ड पॉइंट और अन्य लाभ मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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बढ़ सकते हैं खर्च
दूसरी ओर लिमिट बढ़ने के कुछ नुकसान भी हैं। अधिक लिमिट होने पर कई लोग जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने लगते हैं। फेस्टिव सीजन में आकर्षक ऑफर और छूट के कारण खर्च तेजी से बढ़ सकता है। पहले जहां ग्राहक सीमित खरीदारी करता था, वहीं ज्यादा लिमिट मिलने के बाद अतिरिक्त खर्च करने का प्रलोभन बढ़ सकता है। यही स्थिति बाद में आर्थिक दबाव का कारण बन सकती है।
भुगतान में चूक का असर
यदि बढ़ी हुई लिमिट का उपयोग करने के बाद ग्राहक समय पर बिल नहीं चुका पाता, तो उसे भारी ब्याज और लेट फीस का सामना करना पड़ सकता है। लगातार भुगतान में देरी होने पर क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित होता है। खराब क्रेडिट स्कोर भविष्य में होम लोन, कार लोन या अन्य वित्तीय सुविधाएं लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए केवल उपलब्ध लिमिट देखकर खर्च बढ़ाना समझदारी नहीं माना जाता।
फैसला सोच-समझकर लें
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का फैसला व्यक्ति की आय, खर्च की आदत और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। यदि आप हर महीने पूरा बिल समय पर चुकाते हैं और वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हैं, तो बढ़ी हुई लिमिट फायदेमंद हो सकती है। लेकिन अगर अनियोजित खर्च की संभावना ज्यादा है, तो यह सुविधा परेशानी भी बढ़ा सकती है। इसलिए बैंक का ऑफर स्वीकार करने से पहले उसके फायदे और जोखिम दोनों को समझना जरूरी है।