आजकल सैलरी आते ही कई लोग एक साथ कई क्रेडिट कार्डों के बिल चुकाने में फंस जाते हैं, और यही लापरवाही उनके सिबिल स्कोर पर भारी पड़ती है. भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल कल्चर के बीच क्रेडिट कार्ड सिर्फ सुविधा नहीं, लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गए हैं. रिपोर्ट्स कहती हैं कि हर तीसरे कार्डधारक के पास दो या उससे ज्यादा कार्ड हैं. ऑफर्स, कैशबैक और रिवॉर्ड्स की चमक में लोग भूल जाते हैं कि एक गलती उनके क्रेडिट स्कोर को नीचे गिरा सकती है और भविष्य में किसी भी लोन की मंजूरी मुश्किल बना सकती है.
कार्ड का इस्तेमाल समझदारी से करना जरूरी
एक से ज्यादा कार्ड रखना गलत नहीं, लेकिन उनका इस्तेमाल समझदारी से करना जरूरी है. उदाहरण के तौर पर, अगर आपके दो कार्ड की कुल लिमिट 2 लाख रुपये है और आप केवल 50,000 रुपये खर्च करते हैं, तो क्रेडिट यूजेशन सिर्फ 25% रहेगा. यह बैंक के लिए संकेत है कि आप उधारी पर निर्भर नहीं हैं, और ऐसे ग्राहक को भरोसेमंद माना जाता है. लेकिन जैसे ही आप लिमिट को ज्यादा खर्च करने लगते हैं या कई नए कार्ड्स के लिए आवेदन करते रहते हैं, तो आपके नाम पर लगातार हार्ड इनक्वायरी दर्ज होती है, जिससे क्रेडिट स्कोर तेजी से गिरता है.
सालाना फीस बचाने के लालच में
कई लोग एक छोटी सी चूक कर बैठते हैं किसी एक कार्ड का बिल समय पर नहीं भरते. यही देरी आपका पूरा सिबिल स्कोर खराब कर देती है, क्योंकि क्रेडिट ब्यूरो इसे डिफॉल्ट मानकर रिपोर्ट में दर्ज कर देता है. एक और आम गलती यह है कि लोग सालाना फीस बचाने के लालच में पुराने कार्ड बंद कर देते हैं. यह कदम आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को छोटा कर देता है और बैंक को संकेत देता है कि आपकी वित्तीय स्थिरता कम है.
एक्सपर्ट्स की राय अहम
तो आखिर कितने क्रेडिट कार्ड रखना सही है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि सामान्य कमाई वाले व्यक्ति के लिए 2 से 3 कार्ड काफी हैं. बिजनेस या लगातार यात्रा करने वाले लोगों के लिए 4 कार्ड तक उचित हैं लेकिन तभी जब उनके बिल समय से भरे जा सकें. इससे ज्यादा कार्ड रखने से प्लास्टिक प्रेशर बढ़ता है और आपके वित्तीय स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. याद रखिए, क्रेडिट कार्ड एक फाइनेंशियल टूल है सही इस्तेमाल करें तो सिबिल स्कोर चमकता है, गलत इस्तेमाल करें तो वही टूल आपको आर्थिक मुश्किल में डाल देता है.