किसानों को दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराने वाला उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक एक बार फिर वित्तीय दबाव में दिखाई दे रहा है। बैंक के ताजा आंकड़े बताते हैं कि कर्ज की वसूली में बड़ी गिरावट आई है, जबकि बैंक का बकाया ऋण लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में बैंक ने 561.42 करोड़ रुपये की वसूली की, जबकि 2024-25 में यह रकम 725.75 करोड़ रुपये थी। यानी एक साल में वसूली 164.33 करोड़ रुपये यानी करीब 22.6 प्रतिशत घट गई। इतना ही नहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31 अगस्त तक बैंक की वसूली सिर्फ 80.30 करोड़ रुपये दर्ज हुई है।
विपरीत बैंक की उधारी लगातार बढ़ी
वसूली में गिरावट का असर बैंक के मुनाफे पर भी साफ दिख रहा है। बैंक का शुद्ध लाभ 2023-24 में 98.31 करोड़ रुपये था। अगले वर्ष यह घटकर 11.05 करोड़ और 2025-26 में महज 4.24 करोड़ रुपये रह गया। दो साल में शुद्ध लाभ करीब 95.7 प्रतिशत घट चुका है। केवल पिछले एक साल में ही लाभ में करीब 61.6 प्रतिशत की कमी आई। इसके विपरीत बैंक की उधारी लगातार बढ़ी है। 2023-24 में बैंक की उधारी 1054.58 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में 1234.74 करोड़ और 2025-26 में बढ़कर 1326.82 करोड़ रुपये हो गई। यानी दो साल में उधारी 272.24 करोड़ रुपये बढ़ी।
बैंक की कुल ऋण राशि भी बढ़ी है। 2023-24 में यह 2693.10 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में 2822.49 करोड़ और 2025-26 में 2923.24 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके उलट ऋण वितरण लगातार घटा। 2023-24 में 408.53 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में 393.17 करोड़ और 2025-26 में 363.22 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया। यानी दो साल में नए ऋण वितरण में 45.31 करोड़ रुपये की कमी आई।
बैंक की स्थापना ही किसानों को दीर्घकालीन कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों के लिए ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी। वर्तमान में इसकी 323 शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही हैं। बैंक के अनुसार लघु सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, डेयरी, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों के लिए ऋण दिया जाता है। ऐसे में पुराने कर्ज की वसूली कमजोर पड़ना और नए ऋण वितरण में कमी ग्रामीण ऋण व्यवस्था के लिए चुनौती है।
मंत्री भी जता चुके हैं वसूली पर चिंता
सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर ने बैंक की स्थिति पर पहले कहा था कि बकाये कर्ज की वसूली नहीं होगी तो बैंक का काम कैसे चलेगा। उन्होंने बताया कि बैंक का एनपीए 96 प्रतिशत से घटाकर 76 प्रतिशत तक लाने में सफलता मिली है, लेकिन लापरवाही होने पर स्थिति फिर बिगड़ सकती है। लक्ष्य के मुकाबले 45 प्रतिशत से भी कम वसूली करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात भी सामने आई थी।
बैंक की मौजूदा तस्वीर में यही सबसे बड़ा सवाल है कि ऋण का आकार बढ़ने के बावजूद उसकी वापसी की रफ्तार क्यों कमजोर हुई। खासकर तब, जब 2025-26 में बैंक का संकलित लाभ 216.59 करोड़ रुपये तक पहुंचा, लेकिन उसी अवधि का शुद्ध लाभ सिर्फ 4.24 करोड़ रुपये रहा।