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Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र इस बार भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। 21 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र कई अहम चर्चाओं और विधेयकों के लिए निर्धारित था, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच लगातार टकराव की वजह से अधिकांश समय बेकार चला गया। शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई, लेकिन इसके बाद बिहार में मतदाता सूची संशोधन और आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से जुड़े विधेयकों को लेकर गहमागहमी बढ़ गई। विपक्षी सांसदों ने सरकार को घेरे रखा और कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
किस मुद्दे पर हुआ बवाल?
इस सत्र में विपक्ष ने खासतौर पर बिहार में मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों—जिनमें गिरफ्तारी के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान था—पर भी जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने बिल फाड़कर सदन में उछाल दिए, जिससे माहौल और गरमा गया। नतीजा यह हुआ कि लोकसभा में जहां 120 घंटे की चर्चा का लक्ष्य था, वहां केवल 37 घंटे ही काम हो सका। हालांकि, इस दौरान लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 14 विधेयक पास हुए।
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कितने करोड़ का हुआ नुकसान?
संसद की कार्यवाही पर हर मिनट करीब 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। यानी एक घंटे में लगभग 1.5 करोड़ रुपये लगते हैं। ये आंकड़े 2012 में बताए गए थे, लेकिन अब खर्च इससे कहीं अधिक माना जाता है। अगर 120 घंटे की बजाय केवल 37 घंटे चर्चा हुई, तो अनुमान लगाया जा रहा है कि देश को करीब 1245 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें प्रसारण, एयर कंडीशनिंग, अतिरिक्त कर्मचारियों और सांसदों के भत्ते भी शामिल हैं। यह पैसा सीधे टैक्सपेयर्स की जेब से आता है। जबकि पिछला बजट सत्र 118% प्रोडक्टिविटी के साथ सफल रहा था, मानसून सत्र ने उत्पादकता और खर्च दोनों मामलों में निराश किया।