मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब साफ तौर पर तेल बाजार पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तकरार के बीच कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक बाजार में हलचल तेज हो गई है और इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में तेज बढ़त
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.30 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई भी चढ़कर 94.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। दोनों के बीच 11 डॉलर से ज्यादा का अंतर बनना बाजार में अस्थिरता का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के चलते कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
इन शहरों में बढ़े दाम
तेल कंपनियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नोएडा में पेट्रोल बढ़कर 94.90 रुपये और डीजल 88.01 रुपये प्रति लीटर हो गया है। गुरुग्राम में पेट्रोल 95.65 रुपये और डीजल 88.10 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं पटना में पेट्रोल 105.59 रुपये और डीजल 91.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इन शहरों में हल्की लेकिन लगातार बढ़त ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
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महानगरों में फिलहाल स्थिरता
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 103.44 और डीजल 89.97 रुपये, चेन्नई में पेट्रोल 100.76 और डीजल 92.35 रुपये, जबकि कोलकाता में पेट्रोल 104.95 और डीजल 91.76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
तनाव बढ़ा तो और महंगा हो सकता है ईंधन
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ेगा, जहां ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
आम लोगों पर बढ़ेगा दबाव
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है।