Crude Oil 95 Dollar Fuel Prices : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को ईंधन की कीमतों और देश में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को लेकर कई अहम बातें कहीं। कच्चे तेल की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक आने के बाद सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।
तीन बार घटाया गया उत्पाद शुल्क
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में अब तक तीन मौकों पर कटौती कर चुकी है। नवंबर 2021 में पहली बार राहत दी गई थी। इसके बाद मई 2022 में उत्पाद शुल्क घटाया गया। सबसे हाल में 10 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल दोनों पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। सरकार के मुताबिक, इन फैसलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम करना था।
टैक्स कटौती से राजस्व पर पड़ा असर
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटाने से सरकार के राजस्व पर बड़ा असर पड़ा। हालांकि, सरकार के सामने उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से बचाने और देश में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती भी थी। कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों में कमी से आगे ईंधन की कीमतों को लेकर कुछ राहत की संभावना बनी है, लेकिन घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने में कई अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं।
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निजी पंपों पर बिक्री की कोई सीमा नहीं
निजी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमित किए जाने की चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। पेट्रोलियम सचिव के मुताबिक, किसी भी निजी कंपनी को पेट्रोल या डीजल की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है। सरकार इस संबंध में पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। ऐसे में निजी पंपों पर बिक्री को लेकर सामने आ रही किसी भी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
सीबीजी उत्पादन दस गुना करने की तैयारी
सरकार अब कचरे और जैविक स्रोतों से बनने वाली संपीड़ित जैव गैस यानी सीबीजी के उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। गोबरधन योजना के तहत सीबीजी उत्पादन को दस गुना बढ़ाने की तैयारी है। फिलहाल देश में 217 सीबीजी संयंत्र चालू बताए गए हैं, जबकि 357 संयंत्र तैयार किए जा रहे हैं। सरकार ने सीबीजी की निश्चित खरीद की व्यवस्था भी शुरू की है। इसके साथ ही पुराने कचरे के ढेरों को हटाने, कचरा प्रसंस्करण सुधारने और जैव ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।