Crude Oil Price : दुनियाभर के तेल बाजार से राहत देने वाली खबर सामने आई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और ब्रेंट क्रूड पहली बार तीन सप्ताह में 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की बढ़ती उम्मीद और मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों ने तेल बाजार पर सीधा असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गिरावट अगले कुछ सप्ताह तक बनी रहती है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
ब्रेंट और WTI दोनों में आई बड़ी गिरावट
आज के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 79.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिसमें करीब 5.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं WTI क्रूड 75.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले स्तर से करीब 6.2 फीसदी नीचे है। भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जहां यह लगभग 7,860 रुपये प्रति बैरल पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में इसमें करीब 177 रुपये की कमी दर्ज की गई।
क्यों आई कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट?
तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बातचीत को माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान और ओमान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। वहीं कतर भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच अस्थायी समुद्री मार्ग को लेकर भी चर्चा आगे बढ़ रही है। इससे वैश्विक बाजार को उम्मीद मिली है कि तेल सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा कम हो सकता है।
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भारत को कितना होगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने से देश का आयात बिल कम हो सकता है। अनुमान है कि कच्चे तेल में प्रति डॉलर की गिरावट से भारत का आयात खर्च करीब 10,000 करोड़ रुपये तक कम हो सकता है। इससे सरकार पर दबाव घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। साथ ही ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और उद्योगों की लागत कम होने से महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल और डीजल भी सस्ते होंगे। फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में किसी बदलाव का ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लंबे समय तक इसी स्तर पर बना रहता है, तो आने वाले समय में खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है। इससे आम लोगों के साथ-साथ परिवहन और कारोबार से जुड़े क्षेत्रों को भी राहत मिल सकती है।
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
कच्चा तेल सस्ता होने का फायदा सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत घटने से फल, सब्जियां, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की कई जरूरी वस्तुओं की ढुलाई सस्ती हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है और आम लोगों के घरेलू बजट को राहत मिलती है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि वैश्विक हालात आगे कैसे बदलते हैं और क्या कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं।