अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है। मंगलवार को कच्चे तेल का भाव बढ़कर 85.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। भारत के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल विदेश से खरीदता है। ऐसे में अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज को लेकर ट्रंप के बयान से हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज समुद्री रास्ते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान और उसके ग्राहकों से जुड़े जहाजों को रोका जा सकता है जबकि दूसरे देशों के लिए रास्ता खुला रहेगा। उन्होंने यहां से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी शुल्क लेने की बात भी कही है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा करेगा और इसके बदले शुल्क लिया जाएगा। इस बयान के बाद तेल की सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भारत के लिए क्यों बड़ी है परेशानी
होर्मुज का समुद्री रास्ता भारत के लिए बेहद जरूरी है। भारत जो कच्चा तेल विदेश से खरीदता है उसका करीब 40 से 45 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से आता है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही में परेशानी बढ़ती है तो भारत तक तेल पहुंचने में देरी हो सकती है। इसके साथ ही तेल महंगा होने से भारत का खर्च भी बढ़ेगा। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव सीधे भारत की चिंता बढ़ा रहा है और इसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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रसोई गैस की कीमतों पर भी बढ़ सकता है दबाव
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं बल्कि रसोई गैस को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। भारत अपनी जरूरत की करीब 60 फीसदी रसोई गैस विदेश से खरीदता है। इसमें से करीब 90 फीसदी गैस होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचती है। अगर इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही कम होती है तो रसोई गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 12 जुलाई के बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या करीब 52 फीसदी कम हुई है।
पेट्रोलियम मंत्री ने रसोई गैस पर क्या कहा
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमत बढ़ने की आशंका पर सीधे कुछ नहीं कहा। हालांकि उन्होंने बताया कि सरकार आम ग्राहकों को रसोई गैस सिलेंडर उसकी असली कीमत से करीब 600 रुपये कम में दे रही है। वहीं 10.56 करोड़ उज्ज्वला परिवारों को करीब 900 रुपये की राहत दी जा रही है। मंत्री के बयान से साफ है कि सरकार फिलहाल लोगों को राहत देने की कोशिश कर रही है लेकिन कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें सरकारी तेल कंपनियों के लिए परेशानी बढ़ा सकती हैं।
अब पेट्रोल और गैस के दाम पर टिकी नजर
फिलहाल भारत में पेट्रोल डीजल या रसोई गैस की कीमत बढ़ाने को लेकर सरकार ने कोई ऐलान नहीं किया है। लेकिन कच्चा तेल 85 डॉलर के पार पहुंचने और होर्मुज में बढ़ते तनाव ने चिंता जरूर बढ़ा दी है। अगर तेल की कीमत इसी तरह बढ़ती रही और जहाजों की आवाजाही में परेशानी आई तो तेल कंपनियों पर खर्च का बोझ बढ़ सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार बढ़े हुए खर्च को खुद संभालेगी या आने वाले दिनों में इसका असर पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी दिखाई देगा।