आज की आधुनिक दुनिया जिस रफ्तार से चल रही है, उसकी असली ताकत कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल है। यह सिर्फ पेट्रोल-डीजल का स्रोत नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। घर से लेकर फैक्ट्री, सड़क से लेकर आसमान तक हर जगह इसकी जरूरत है। यही वजह है कि जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, सबसे पहले तेल की सप्लाई को लेकर चिंता शुरू हो जाती है।
परिवहन की पूरी दुनिया तेल पर टिकी
दुनिया के लिए क्रूड ऑयल इतना जरूरी होने का सबसे बड़ा कारण परिवहन क्षेत्र है। सड़क पर दौड़ती कारें, बसें, ट्रक, ट्रेनें, समुद्र में चलने वाले जहाज और हवाई जहाज—इन सभी को चलाने के लिए ईंधन कच्चे तेल से ही तैयार होता है। अगर तेल की सप्लाई अचानक रुक जाए, तो दुनिया भर में सामानों की आवाजाही ठप हो सकती है और पूरी आर्थिक व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
प्लास्टिक से दवाइयों तक हर चीज में इस्तेमाल
बहुत कम लोग जानते हैं कि क्रूड ऑयल केवल ईंधन नहीं, बल्कि हजारों चीजों का कच्चा माल भी है। पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री इसी तेल से प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, उर्वरक, डिटर्जेंट, कॉस्मेटिक्स और दवाइयों के कई जरूरी तत्व तैयार करती है। मोबाइल फोन, पैकेजिंग, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों में भी किसी न किसी रूप में कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है।
दुनिया हर दिन कितना तेल खपा देती है?
अगर आंकड़ों की बात करें तो दुनिया की तेल पर निर्भरता बेहद बड़ी है। पूरी दुनिया मिलकर हर दिन करीब 9.5 करोड़ से 10 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चे तेल की खपत करती है। एक बैरल में लगभग 159 लीटर तेल होता है। यानी हर 24 घंटे में धरती से अरबों लीटर तेल निकाला जाता है और इस्तेमाल कर लिया जाता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में छोटा सा बदलाव भी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर देता है।
ऊर्जा और अर्थव्यवस्था का सीधा कनेक्शन
कई देशों में आज भी बिजली उत्पादन और औद्योगिक कामकाज के लिए कच्चे तेल पर निर्भरता बनी हुई है। किसी भी देश की आर्थिक ताकत इस बात से भी तय होती है कि उसके पास ऊर्जा के कितने संसाधन हैं। जिन देशों के पास तेल के बड़े भंडार हैं, वे वैश्विक राजनीति और व्यापार में ज्यादा प्रभाव रखते हैं। इसी कारण तेल को “काला सोना” कहा जाता है।
क्या खत्म हो सकता है यह संसाधन?
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कच्चा तेल एक सीमित संसाधन है। जिस तेजी से इसका इस्तेमाल हो रहा है, उसके हिसाब से आने वाले दशकों में दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि अब दुनिया धीरे-धीरे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रही है, ताकि भविष्य सुरक्षित किया जा सके।