Crude Oil Price India Impact : दुनिया के तेल बाजार में इस समय काफी हलचल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। 29 सितंबर को ब्रेंट कच्चा तेल करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसका असर भारत पर भी दिख रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है।
पश्चिम एशिया के तनाव से तेल महंगा
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह तेल की सप्लाई को लेकर चिंता है। पश्चिम एशिया से तेल की आवाजाही पर खतरा बढ़ने से दुनिया भर के खरीदारों में चिंता है। अगर सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
भारत क्यों है ज्यादा प्रभावित
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। हाल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत की कच्चे तेल पर आयात निर्भरता करीब 88 प्रतिशत रही। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात खर्च पर पड़ता है।
बढ़ सकता है देश का आयात खर्च
महंगे तेल का मतलब है कि भारत को वही मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल सालाना आधार पर 48.4 प्रतिशत बढ़कर 74.8 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान आयात की मात्रा में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई थी, लेकिन कीमतों ने खर्च बढ़ा दिया।
रुपये पर भी पड़ सकता है दबाव
तेल खरीदने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। जब तेल की कीमत बढ़ती है तो डॉलर की मांग भी बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव आता है। 29 सितंबर को रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया और उसी दिन तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई।
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पेट्रोल डीजल से लेकर महंगाई तक असर
महंगे कच्चे तेल का असर पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की लागत पर पड़ सकता है। इसका प्रभाव परिवहन और माल ढुलाई के खर्च पर भी आ सकता है। आगे चलकर इसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन की कीमतों पर वास्तविक असर कई बातों पर निर्भर करता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय तेल कीमत, रुपया-डॉलर दर और घरेलू कीमत तय करने की व्यवस्था शामिल है। भारत सरकार ने भी बताया है कि कच्चे तेल की कीमतों का महंगाई पर असर इन सभी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।