हवाई सफर करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने लगी है। ऐसे में अब हवाई टिकट के दाम कम होने की उम्मीद भी बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रही तो एयरलाइंस से सर्ज चार्ज और अतिरिक्त किराए की समीक्षा करने को कहा जा सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है। अभी यह देखना जरूरी है कि तेल की कीमतों में आई गिरावट स्थायी है या सिर्फ कुछ दिनों की है।
एटीएफ के दाम पर सरकार की नजर
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को एयर टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ कहा जाता है। एटीएफ की कीमतें सीधे तौर पर कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव से जुड़ी होती हैं। सरकार हर पखवाड़े एटीएफ के दाम की समीक्षा करती है। अगर एटीएफ महंगा होता है तो एयरलाइंस का खर्च बढ़ जाता है और इसका असर यात्रियों के टिकट पर भी दिखता है। मंत्री ने कहा कि सरकार एटीएफ की कीमतों को बहुत करीब से देख रही है। एयरलाइंस से भी बातचीत की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि तेल की कीमतों में कमी कितने समय तक टिक सकती है।
स्थिरता के बाद होगी बड़ी बात
सरकार का कहना है कि केवल एक-दो दिन की गिरावट देखकर हवाई किराया कम करने का फैसला नहीं लिया जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि कच्चे तेल और एटीएफ के दाम लंबे समय तक स्थिर रहें। मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार पहले यह साफ करना चाहती है कि कीमतों में कमी स्थायी है या अचानक आई गिरावट है। अगर यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो एयरलाइंस से सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क कम करने के लिए बातचीत की जाएगी। इससे त्योहारों छुट्टियों और जरूरी यात्रा के दौरान महंगे टिकट से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
ये भी पढ़ें : PM Modi से मुलाकात के बाद Amazon का बड़ा ऐलान, भारत में 4.50 लाख करोड़ रुपये निवेश से बदल सकती है तस्वीर
10 हजार करोड़ का बनाया गया कोष
सरकार ने एयरलाइंस को मुश्किल समय में मदद देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का मूल्य स्थिरीकरण कोष भी बनाया है। इसका मकसद यह है कि ईंधन के दाम अचानक बढ़ने पर एयरलाइंस पर पूरा दबाव न पड़े। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने विमानन क्षेत्र की चिंता बढ़ाई थी। सरकार का मानना है कि अगर एयरलाइंस को ईंधन और वित्तीय मोर्चे पर सहारा मिलेगा तो वे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालने से बच सकती हैं। हालांकि किराया कम करने का अंतिम फैसला एयरलाइंस की लागत और बाजार की स्थिति देखकर ही होगा।
तनाव के दौरान किए गए कई कदम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी। इसका असर एटीएफ के दाम पर भी पड़ा था। सरकार ने उस दौरान घरेलू एयरलाइंस को राहत देने के लिए एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी पर नियंत्रण रखने जैसे कदम उठाए। हवाई अड्डों के कुछ शुल्क कम किए गए और आपातकालीन क्रेडिट लिंकेज योजना के तहत सहायता बढ़ाई गई। सरकार चाहती है कि एयरलाइंस की आर्थिक स्थिति मजबूत रहे और यात्रियों को भी बहुत ज्यादा किराया न देना पड़े। अब तेल के भाव कम होने के बाद सरकार के सामने किराया घटाने का दबाव भी बढ़ सकता है।
यात्रियों को कब मिलेगी राहत
फिलहाल यात्रियों को हवाई टिकट सस्ता होने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार ने साफ कहा है कि पहले कच्चे तेल और एटीएफ की कीमतों में स्थिरता देखी जाएगी। इसके बाद एयरलाइंस से अतिरिक्त शुल्क और सर्ज प्राइसिंग कम करने पर चर्चा होगी। अगर तेल के भाव लगातार नीचे रहे तो आने वाले दिनों में हवाई किराए में राहत मिल सकती है। खासकर उन लोगों को फायदा होगा जो काम इलाज पढ़ाई या परिवार से मिलने के लिए अक्सर फ्लाइट से सफर करते हैं। अब सबकी नजर सरकार और एयरलाइंस की अगली बैठक पर टिकी है।