पश्चिमी एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते की घोषणा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड करीब 84 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है। इससे वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना है और ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
होर्मुज क्यों है दुनिया की लाइफलाइन?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के चलते इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। विशेषज्ञों का मानना था कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती थीं। अब मार्ग खुलने से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है।
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भारत को मिलेगा सीधा फायदा
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने का सीधा फायदा भारत को मिल सकता है। कच्चे तेल के दाम घटने से देश का आयात बिल कम होगा और तेल कंपनियों की लागत भी घटेगी। इसके अलावा शिपिंग और ट्रांसपोर्टेशन खर्च में कमी आने से सरकार और उद्योग दोनों को राहत मिल सकती है। इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी कुछ हद तक कम होगा।
पेट्रोल-डीजल सस्ते होने की उम्मीद
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी दिख सकता है। हाल के महीनों में वैश्विक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा था। अब तेल 80 डॉलर के आसपास पहुंचने से कंपनियों के लिए राहत की स्थिति बन सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि यह गिरावट बनी रहती है तो पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक कमी देखने को मिल सकती है। वहीं एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।