Crude Oil Prices : अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.22 डॉलर प्रति बैरल टूटकर 93.17 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.20 डॉलर गिरकर 85.86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि कीमतों में यह नरमी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई थी।
मुनाफावसूली से नीचे आए दाम
विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली शुरू की, जिसके चलते तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। बाजार की नजर अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए जाने वाले संभावित नए प्रतिबंधों पर भी टिकी हुई है। इसी वजह से निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव बना चिंता की वजह
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी प्रशासन ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि ईरान पर अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर
तनाव के बीच ईरान ने ऐसा संकेत दिया है जिसने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि नए प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी से तेल निर्यात प्रभावित करने जैसे कदम उठा सकता है। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है और वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है।
भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है असर
अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है और तेल सप्लाई प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता की बात हो सकती है। कच्चे तेल के महंगा होने का असर सीधे आयात बिल और ईंधन लागत पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल से लेकर महंगाई तक असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें फिर चढ़ती हैं तो ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ सकती है, कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है और कई जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के अगले कदम और ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी या फिर एक बार फिर तेजी का दौर शुरू होगा।