मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। इसका असर भारत पर भी साफ दिख रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है। पिछले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे सरकार और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।
कीमतें पहुंचीं रिकॉर्ड के करीब
ताजा आंकड़ों के अनुसार कच्चा तेल 146 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। यह 18 साल पुराने रिकॉर्ड के बेहद नजदीक है। फरवरी में जहां कीमतें करीब 69 डॉलर थीं, वहीं अब इसमें 65 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इतनी तेजी से बढ़ती कीमतें बाजार के लिए बड़ा संकेत हैं।
सप्लाई पर पड़ा बड़ा असर
जंग के कारण समुद्री रास्तों से होने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। कई जगहों पर रुकावटें आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इससे तेल की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ा है, जो आने वाले समय में और बढ़ सकता है।
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भारत ने अपनाई नई रणनीति
इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब देश अलग-अलग रास्तों से तेल मंगाने पर जोर दे रहा है। पहले जहां एक खास क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता थी, अब उसे कम किया जा रहा है ताकि सप्लाई में कोई कमी न आए।
तेल सप्लाई को लेकर राहत
सरकार का कहना है कि देश में तेल की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही वैकल्पिक इंतजाम भी किए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में ईंधन की कमी न हो।
आगे भी सतर्क रहना जरूरी
हालांकि मौजूदा हालात में राहत की खबर है, लेकिन वैश्विक स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसलिए सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर नए कदम उठा सकती है।