कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। 2022 के बाद पहली बार क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो कीमतें और खतरनाक स्तर छू सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव की जड़
दुनिया की तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता सीधे तेल की कीमतों को प्रभावित करती है। अमेरिका द्वारा ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति ने इस अहम मार्ग को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
ट्रंप के बयान से बाजार में उथल-पुथल
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रह सकती है, जब तक परमाणु समझौते पर ठोस प्रगति नहीं होती। इस सख्त रुख ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर कीमतें
ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसे स्तर देखने को मिले थे। मौजूदा हालात ने एक बार फिर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है।
सैन्य कार्रवाई की आशंका ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की सैन्य तैयारी भी चर्चा में है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की खबरों ने बाजार में डर का माहौल बना दिया है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
क्या 150 डॉलर तक जाएगा क्रूड?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का भारी दबाव पड़ सकता है और आम लोगों की जेब पर सीधा असर दिख सकता है।