अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ी तेजी देखने को मिली है। गुरुवार सुबह तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। बताया जा रहा है कि कीमतों में करीब 8 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है। तेल बाजार में आई इस तेजी ने दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और कई देशों की नजर अब मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिक गई है।
टैंकरों पर हमले से बढ़ा तनाव
तेल की कीमतों में तेजी के पीछे हाल ही में हुई एक बड़ी घटना को वजह माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार इराक के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि विस्फोटकों से भरी नावों के जरिए इन टैंकरों पर हमला किया गया। इस घटना के बाद इराक ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने सभी तेल टर्मिनलों पर काम अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
सप्लाई रुकने से बढ़ी बाजार की चिंता
तेल टर्मिनल बंद होने के बाद बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी सप्लाई में रुकावट आती है तो बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि इस घटना के बाद कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर चले गए। कई देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
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तेल कीमतों को लेकर बढ़ा वैश्विक विवाद
बताया जा रहा है कि यह तनाव तेल की कीमतों को लेकर चल रहे वैश्विक विवाद से भी जुड़ा हुआ है। कुछ देशों ने बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने का फैसला लिया था ताकि कीमतों को कम किया जा सके। लेकिन इस कदम से कुछ देशों में नाराजगी भी बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तनाव के कारण हालात और जटिल हो गए हैं।
ईरान की सख्त चेतावनी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमले जारी रहे तो तेल की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं। यहां तक कहा गया है कि हालात बिगड़ने पर तेल का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कड़े संकेत दिए गए हैं।
भारत और बाजारों पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और मिडिल ईस्ट इसके लिए अहम क्षेत्र है। अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो देश में ईंधन के दाम और महंगाई पर असर पड़ सकता है। इसी चिंता के कारण भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई और निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।