नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने फर्जी सिम पोर्टिंग और बैंक खातों से अवैध निकासी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक व्यक्ति के खातों से 38.10 लाख रुपये की ठगी की थी।
डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक, इस संबंध में 12 जनवरी 2026 को ई-एफआईआर संख्या 0008/2026 थाना क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4)/319/340 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि 30 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच जालसाजों ने उसके मोबाइल फोन तक अवैध पहुंच बनाकर उसका सिम पोर्ट कर लिया और बैंकिंग एप्लिकेशन के जरिए कई खातों से रकम निकाल ली।इंस्पेक्टर मनजीत कुमार के नेतृत्व में एसआई प्रवेश कुमार राठी समेत टीम ने एसीपी अनिल शर्मा के पर्यवेक्षण में जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के जरिए झांसा देकर पीड़ित से उसके मोबाइल का एक्सेस हासिल किया। इसके बाद एसएमएस अलर्ट और कॉल फॉरवर्डिंग डायवर्ट कर सिम को झारखंड के जामताड़ा स्थित नेटवर्क से पोर्ट करा लिया। फिर IMPS/NEFT/UPI के माध्यम से रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई।
बैंक खातों के विश्लेषण के दौरान एक पीएनबी खाते में 99,999 रुपये ट्रांसफर होने का पता चला, जो विपुल कश्यप नामक व्यक्ति के नाम पर था। पुलिस ने 4 मई 2026 को उसे ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी आयुष शर्मा (21) को भी नोएडा से दबोचा गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आयुष शर्मा इंस्टाग्राम विज्ञापनों के जरिए लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और सिम कार्ड किराए पर लेता था। एक अन्य आरोपी विशाल कुमार (भिवाड़ी, राजस्थान), जिसने सिम कार्ड उपलब्ध कराया था, को भी ट्रेस कर पूछताछ की गई है।
मामले की आगे की जांच जारी है।