थाना साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के झूठे डर से 2.10 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी के मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ठगी में इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट के धारक अमन कुमार (26 वर्ष) को मंगलवार को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया गया।
ठगी कैसे की गई थी?
10 अप्रैल 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों ने पीड़ित को फोन कर खुद को एनआईए पुणे का अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित को बताया कि उनके आधार कार्ड से लिंक बैंक खातों का इस्तेमाल टेरर फंडिंग में हो रहा है। गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए अपराधियों ने व्हाट्सएप पर आरबीआई का फर्जी पत्र और वारंट भेजा। इस भय और दबाव में पीड़ित को लगातार संपर्क बनाए रखकर कुल 2,10,00,000 रुपये (2.10 करोड़) की राशि अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ठग ली गई। पहले से इस मामले में दो अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अमन कुमार का रोल और कैसे काम करता था?
अमन कुमार पुत्र संजय कुमार, निवासी चरखी दादरी, हरियाणा एक म्यूल अकाउंट होल्डर था। जांच में पता चला कि ठगी की गई राशि में से 2.20 लाख रुपये सीधे उसके बैंक खाते में आए थे। साइबर अपराधी आमतौर पर ऐसे लोगों को लालच देकर (कमीशन या किराए के नाम पर) अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या यूपी आई आईडी इस्तेमाल करने के लिए देते हैं। अमन कुमार का खाता भी उसी श्रेणी का था। अपराधी इस खाते का इस्तेमाल धोखाधड़ी की राशि को रिसीव करने, फिर उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने और अंत में कैश निकालने या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते थे। जांच के दौरान पाया गया कि अमन कुमार के संयुक्त या संबंधित बैंक खातों से जुड़े मामले उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र (विशेषकर महाराष्ट्र में 3 मामले) में दर्ज हैं। यह दर्शाता है कि वह साइबर गैंग के लिए नियमित रूप से म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता रहा होगा।
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर की टीम ने अभिसूचना संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के आधार पर अमन कुमार तक पहुंच बनाई। बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल् व्हाट्सएप चैट्स अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर मंगलवार को उसे चरखी दादरी, हरियाणा से गिरफ्तार किया गया।
साइबर क्राइम पुलिस की चेतावनी:
“डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज नहीं होती। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसे फर्जी कॉल आने पर तुरंत 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। कभी भी अपना बैंक खाता किसी को कमीशन के लालच में न दें — यह म्यूल अकाउंट बन सकता है और आपको भी जेल हो सकती है।