
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने दिल्ली दरियागंज थाने के अधिकारी, सीबीआई अफसर और न्यायिक अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर 33.33 लाख रुपये ठगने वाले दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से ₹99,500 नगद, 39 सिम कार्ड, 21 एटीएम/डेबिट कार्ड, 15 बैंक पासबुक, 13 मोबाइल फोन, चेकबुक, वाईफाई राउटर और एक स्कूटी समेत कई सामान बरामद किए। जांच में सामने आया है कि इनके खातों से अब तक 46 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं।
ऐसे दिया गया था धोखे का शिकार
शिकायतकर्ता को फोन पर पहले ईडी और ट्राई अधिकारी बनकर कॉल की गई और कैनरा बैंक खाते में अवैध लेनदेन का आरोप लगाया गया। इसके बाद दरियागंज थाने के आईपीएस अधिकारी, फिर सीबीआई अफसर और अंत में न्यायिक अधिकारी बनकर कॉल की गई। व्हाट्सएप कॉल पर विभागों और अदालत के लोगो दिखाए गए और एक फर्जी आदेश पीडीएफ भेजा गया, जिसमें “डिजिटल अरेस्ट” का जिक्र था। डर और दबाव में पीड़ित से 33.33 लाख रुपये ठग लिए गए।
गिरफ्तार आरोपी और बड़ा नेटवर्क
पकड़े गए आरोपियों में निखिल गोयल (ऋषिकेश, देहरादून) और हरप्रीत सिंह उर्फ हर्ष (जगदलपुर, छत्तीसगढ़) शामिल हैं। उनका तीसरा साथी राजू (भिलाई, छत्तीसगढ़) अभी फरार है और इस पूरे नेटवर्क का सरगना बताया जा रहा है। राजू भोले-भाले लोगों से बैंक खाते, एटीएम और पासबुक लालच देकर लेता था और फिर उन्हें साइबर ठगी में इस्तेमाल करता था। ठगी से निकाले पैसे का हिस्सा काटकर बाकी रकम USDT (क्रिप्टोकरेंसी) खरीदकर विदेश में बैठे ठगों तक भेजी जाती थी।
पुलिस ने बताया कि जिन पासबुकों और खातों से ठगी की गई, उनमें अब तक 46 करोड़ 55 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़ी 44 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें से एक खाते में अकेले 26 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस अब फरार राजू और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।