Cyclone Arnab Satellite Image : चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और यानम के तट पर दस्तक देने के बाद मौसम की चिंता बढ़ा दी है। भारत के मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS की तस्वीर में तूफान के बादलों का विशाल घेरा दिखाई दिया, जो पूर्वी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्सों तक फैला नजर आया। तस्वीर बुधवार सुबह 9:30 बजे से 9:57 बजे के बीच ली गई थी। इसमें घने बादल और दूर तक फैली बादलों की पट्टियां दिखाई दे रही हैं। हालांकि, बादलों का बड़े इलाके में फैलना यह नहीं बताता कि हर जगह तूफान का सीधा असर होगा। लैंडफॉल के बाद भी कई इलाकों में भारी बारिश और जलभराव का खतरा बना रह सकता है।
आंध्र प्रदेश के तट से टकराया चक्रवात
दी गई जानकारी के मुताबिक, चक्रवात अर्नब ने बुधवार, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार किया। यह प्रक्रिया रात करीब 2 बजे से सुबह 8 बजे के बीच पूरी हुई। तट से टकराते समय तूफान की लगातार हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई, जबकि तेज झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। तूफान का केंद्र नरसापुर से करीब 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व, यानम से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। तट पार करने के बाद चक्रवात जमीन के अंदर बढ़ने लगा।
सैटेलाइट तस्वीर में क्या दिखा
INSAT-3DS भारत का मौसम सैटेलाइट है, जिसका इस्तेमाल बादलों, चक्रवातों और मौसम में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए किया जाता है। इसकी तस्वीर में चमकीले सफेद रंग के घने बादल दिखाई देते हैं। ऐसे बादल अक्सर तेज बारिश और गरज-चमक वाले मौसम से जुड़े होते हैं। तस्वीर में चक्रवात के आसपास बादलों की घुमावदार पट्टियां भी नजर आईं। इनसे तूफान के आसपास बादलों के फैलाव और उनकी बनावट को समझने में मदद मिलती है। हालांकि, सिर्फ सैटेलाइट तस्वीर देखकर जमीन पर हवा की रफ्तार या बारिश की मात्रा का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
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लैंडफॉल के बाद भी क्यों बना है खतरा
समुद्र के ऊपर चक्रवात को गर्म पानी से ऊर्जा मिलती है। जब वह जमीन पर पहुंचता है, तो समुद्र से मिलने वाली गर्मी और नमी कम होने लगती है। जमीन पर मौजूद रुकावटें भी उसकी रफ्तार को प्रभावित करती हैं। इससे तूफान धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है, लेकिन उसका असर तुरंत खत्म नहीं होता। चक्रवात के साथ आए बादल तटीय इलाकों से दूर तक भारी बारिश ला सकते हैं। इसके कारण सड़कों पर पानी भरने, निचले इलाकों में बाढ़ आने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
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तेज हवाओं से पेड़ और बिजली की लाइनें गिरने का डर
चक्रवात के दौरान तेज हवाएं पेड़ों को गिरा सकती हैं और बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है। तट पार करने के बाद तूफान किस दिशा में आगे बढ़ता है और किन इलाकों में बारिश होती है, इस पर नजर रखना जरूरी है। सैटेलाइट तस्वीर से बादलों का फैलाव समझने में मदद मिलती है, जबकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान से संभावित बारिश और खतरे का आकलन किया जाता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।
तूफान की आगे की चाल पर रहेगी नजर
चक्रवात अर्नब के जमीन के अंदर बढ़ने के साथ उसके कमजोर होने की संभावना रहती है, लेकिन बारिश का खतरा कई इलाकों में बना रह सकता है। मौसम विभाग तूफान की दिशा, हवा की रफ्तार और बारिश के आंकड़ों के आधार पर आगे की स्थिति का आकलन करता है। सैटेलाइट से मिली तस्वीर ने चक्रवात के बादलों का बड़ा फैलाव दिखाया है, लेकिन किसी खास इलाके में कितना नुकसान होगा, यह केवल तस्वीर से तय नहीं किया जा सकता। आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट और प्रशासन की सलाह के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए।