FAKE PASSPORT SYNDICATE: मध्य प्रदेश के डबरा के सिमरिया टेकरी से सामने आए फर्जी पासपोर्ट कांड की जांच अब अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचती नजर आ रही है। एसटीएफ की पूछताछ में करीब 200 संदिग्ध पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी सामने आई है, जिनमें 130 नए पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं। जांच में बैतूल और पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के कच्छ के पतों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। अब दस्तावेज तैयार कराने से लेकर पुलिस सत्यापन तक की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
200 पासपोर्ट की जांच, 130 नए नाम रडार पर
एसटीएफ की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी जॉय चौधरी से रिमांड के दौरान पूछताछ में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक करीब 200 पासपोर्ट संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें 130 नए पासपोर्ट को विशेष तौर पर जांच के दायरे में लिया गया है। दस्तावेजों में अलग-अलग पते इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बैतूल और कच्छ के पते का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि कुछ दस्तावेजों में स्थायी पता मध्य प्रदेश के बैतूल का दर्ज था, जबकि स्थानीय पते के तौर पर गुजरात के कच्छ के एक गांव का इस्तेमाल किया गया। यह इलाका पाकिस्तान सीमा के नजदीक है। इसके साथ ही डबरा के सिमरिया वार्ड-1 का पता भी कई पासपोर्ट में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इन पतों की वास्तविकता और वहां रहने वाले लोगों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
15 कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट सत्यापन में लापरवाही की आशंका के बीच डबरा, भोपाल और बैतूल से जुड़े 15 पुलिसकर्मियों और नगर निगम कर्मचारियों की पहचान की गई है। एसटीएफ की ओर से इन कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि संदिग्ध पतों और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर और कैसे किया गया।
जाली दस्तावेज तैयार कराने वालों तक पहुंची जांच
पासपोर्ट के अलावा जाली मार्कशीट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने में मदद करने वाले लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। कुछ शिक्षकों के नाम जांच के दायरे में आए हैं। एसटीएफ पुराने रिकॉर्ड, संबंधित कमेटियों के दस्तावेज और संदिग्ध लोगों के बैंक खातों की जानकारी खंगाल रही है। कच्छ बॉर्डर से जुड़े पतों और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए दस्तावेजों के बीच संबंध तलाशे जा रहे हैं।
बुद्ध विहार में जुटते थे संदिग्ध चेहरे
डबरा नगर पालिका के वार्ड-1 स्थित सिमरिया टेकरी, तथागत बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क के पतों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी कराने में किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धार्मिक आयोजनों के नाम पर यहां बाहरी लोग और संदिग्ध भिक्षु आते-जाते थे। बुद्ध विहार में रह रहे संघप्रिय भंते के अनुसार, मास्टरमाइंड रियाज सीधे सामने नहीं आता था। पुराबनवार निवासी गयाप्रसाद, जो भंते के रूप में सक्रिय था, और माधौनगर निवासी गुलाबराय इन गतिविधियों में आगे रहते थे। आशंका है कि रियाज इन्हीं लोगों के जरिए पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।