Dal Lake Cinema
: श्रीनगर की मशहूर डल झील इन दिनों सिर्फ घूमने की जगह नहीं रही, बल्कि यहां फिल्मों का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान झील के पानी पर बड़ा पर्दा लगाया गया और खुले आसमान के नीचे फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। पहाड़, झील, शिकारे और बड़े पर्दे का यह नजारा सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में है।
झील के बीच बना अनोखा सिनेमाघर
7 से 10 सितंबर तक हुए इस फिल्म महोत्सव में डल झील को खास तरीके से सजाकर खुले आसमान वाला सिनेमाघर बनाया गया। पानी पर लगी स्क्रीन पर फिल्में दिखाई गईं और आसपास मौजूद लोग किनारे से इस पूरे नजारे का मजा लेते दिखे। कुछ लोगों ने शिकारे और नावों से भी इस खास अनुभव को देखा।
शम्मी कपूर की फिल्म से हुई शुरुआत
इस तैरते सिनेमा की शुरुआत 1961 में आई फिल्म ‘जंगली’ की स्क्रीनिंग से हुई। इसके बाद ‘आरजू’, ‘कश्मीर की कली’ और ‘कभी कभी’ जैसी पुरानी फिल्मों को भी डल झील के बीच दिखाया गया। खास बात यह रही कि इन फिल्मों में कश्मीर की खूबसूरत वादियां पहले भी दिखाई जा चुकी हैं।
कश्मीर की खूबसूरती और फिल्मों का पुराना रिश्ता
कश्मीर और हिंदी फिल्मों का रिश्ता काफी पुराना है। डल झील, शिकारे, पहाड़ और घाटी की खूबसूरती कई फिल्मों के गानों और यादगार दृश्यों का हिस्सा रही है। इस बार कहानी थोड़ी अलग थी। पहले फिल्मों में कश्मीर पर्दे पर दिखाई देता था, लेकिन अब उसी कश्मीर में बैठकर लोग पर्दे पर फिल्म देख रहे थे।
पहले फिल्म महोत्सव में दुनिया भर की फिल्में
जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारत के साथ दूसरे देशों की फिल्में भी शामिल हुईं। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के अलावा क्षेत्रीय, लघु और वृत्तचित्र फिल्मों के लिए भी अलग श्रेणियां रखी गई थीं।
सिर्फ फिल्म नहीं, कश्मीर की नई तस्वीर भी
डल झील पर बना यह तैरता सिनेमा सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। इस पहल ने कश्मीर को फिल्मों और कला के एक अलग मंच के रूप में भी सामने रखा। फिल्म महोत्सव का मकसद स्थानीय कहानियों, कलाकारों और संस्कृति को भी बड़े मंच तक पहुंचाना था। यही वजह है कि डल झील का यह नजारा इस पूरे आयोजन की सबसे यादगार तस्वीरों में शामिल हो गया।