नई दिल्ली: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गर्मा गई है। भारत सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न देने की संभावनाएं तेज हो गई हैं, वहीं चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने स्पष्ट कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को वही तय करेगा, जबकि दलाई लामा ने स्वयं कहा है कि यह अधिकार केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट को है। हाल ही में उन्होंने अपना 90वां जन्मदिन मनाया, जहां उन्होंने तिब्बती संस्कृति और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ते रहने का संकल्प दोहराया।
दलाई लामा ने दिया स्पष्ट संदेश
90वें जन्मदिन के मौके पर तिब्बती धर्मगुरु ने कहा, "दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी। मेरे उत्तराधिकारी का चयन केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट द्वारा ही किया जाएगा।" उन्होंने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक ताकतें आध्यात्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। उनका यह बयान चीन के उस दावे के बाद आया जिसमें कहा गया कि उत्तराधिकारी तय करने का अधिकार बीजिंग के पास है।
भारत रत्न को लेकर चर्चा तेज
भारत में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दलाई लामा को भारत रत्न देने की मांग जोर पकड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। दलाई लामा को भारत में निर्वासित जीवन बिताते हुए दशकों हो चुके हैं और उन्होंने अहिंसा व शांति के विचारों को वैश्विक मंचों पर स्थापित किया है।
चीन ने जताई आपत्ति
चीन ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर किसी भी फैसले से दूर रहे। बीजिंग ने कहा कि दलाई लामा को लेकर कोई भी अंतरराष्ट्रीय समर्थन उसकी आंतरिक राजनीति में दखल माना जाएगा। हालांकि भारत की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
तिब्बती समुदाय ने जताई खुशी
तिब्बती समुदाय और दुनियाभर के समर्थकों ने दलाई लामा के 90वें जन्मदिन को शांति और एकता के उत्सव के रूप में मनाया। भारत में बसे लाखों तिब्बती शरणार्थी उन्हें भारत रत्न दिए जाने को अपनी सांस्कृतिक पहचान का सम्मान मानते हैं।