मध्य प्रदेश के देवास जिले से सामाजिक भेदभाव का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने धार्मिक आस्था और जातिगत असमानता के टकराव को उजागर कर दिया है। देवास के ग्राम बेहरी बागली में एक नवविवाहित दलित दंपती जब खुशी-खुशी मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे, तो उन्हें पहले तो सामान्य रूप से मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली। लेकिन जैसे ही उन्होंने राधा-कृष्ण मंदिर के गर्भगृह में जाकर विशेष दर्शन की इच्छा जाहिर की, मंदिर समिति ने उन्हें रोक दिया। इस रोक-टोक के बाद मौके पर हंगामा खड़ा हो गया और मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
यह घटना न सिर्फ जातीय भेदभाव का उदाहरण है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या 21वीं सदी में भी धार्मिक स्थलों पर समान अधिकार सिर्फ दिखावे की बात बनकर रह गए हैं?
गर्भगृह में प्रवेश से रोका, भड़का समुदाय
जानकारी के मुताबिक, दलित नवविवाहित जोड़ा राधा कृष्ण मंदिर में दर्शन के लिए गया था। वे पहले मंदिर के मुख्य परिसर में पूजा कर चुके थे, लेकिन जब उन्होंने गर्भगृह में प्रवेश की इच्छा जताई, तो मंदिर समिति ने उन्हें रोक दिया। समिति का तर्क था कि गर्भगृह में केवल पुजारी को ही जाने की अनुमति होती है, और यह नियम सभी पर लागू होता है।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, दी सख्त नसीहत
इस घटना की खबर मिलते ही बागली थाना प्रभारी प्रदीप राय मौके पर पहुंचे और समुदाय के लोगों को समझाइश दी। उन्होंने मंदिर समिति को भी स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को मंदिर में समान अधिकार है। उन्होंने दो टूक कहा – "जब मंदिर में कोई जानवर मर जाता है, तो सफाई के लिए दलितों को बुलाया जाता है, फिर उन्हें पूजा से क्यों रोका जाता है?"
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, उठे सवाल
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, और लोग मंदिर प्रशासन के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जातिवाद अब भी धार्मिक स्थलों की पवित्रता को दूषित कर रहा है।
Dalit Rights
Temple Entry
Social Discrimination
Police Action, Viral Video