
हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को दामोदर द्वादशी मनाई जाती है। इस वर्ष दामोदर द्वादशी सोमवार, 5 अगस्त 2025 को पड़ रही है। यह दिन भगवान विष्णु के दामोदर रूप की पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, दान करते हैं और भगवान दामोदर की विधिवत पूजा कर सुख, शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
5 अगस्त को दामोदर द्वादशी की पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है। द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी 4 अगस्त को रात 11:36 बजे और समाप्त होगी 5 अगस्त को रात 9:12 बजे। पूजा करने का सर्वोत्तम समय प्रातः 6:00 बजे से 9:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में भगवान दामोदर की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
दामोदर द्वादशी का महत्व
'दामोदर' नाम भगवान विष्णु के उन स्वरूपों में से एक है, जिन्हें माता यशोदा ने ऊखल से बांधा था। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे भाव से इस दिन व्रत करता है, वह पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक की प्राप्ति करता है। साथ ही, संतान सुख, धन-संपत्ति और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
पूजा विधि
दामोदर द्वादशी के दिन प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। फिर भगवान विष्णु को तुलसी पत्र, पीले पुष्प, धूप-दीप और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। 'ॐ नमो भगवते दामोदराय' मंत्र का जाप करते हुए भगवान को भोग अर्पित किया जाता है। शाम के समय दीपदान और तुलसी की परिक्रमा करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या करें दान?
इस दिन अन्न, वस्त्र, घी, फल, और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और तुलसी के पौधे का दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर
दामोदर द्वादशी आध्यात्मिक जागृति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा न केवल मनोकामनाएं पूर्ण करती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।