जब से पाकिस्तानी 'जासूस' ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी हुई है तब से एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं, लेकिन इस बीच एक अहम जानकारी ये सामने आई है कि दानिश जो दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में वीजा डेस्क पर काम करता था. असल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का एजेंट था. उसका मकसद था भारत में जासूसी का नेटवर्क बनाना. जांच में खुलासा हुआ कि दानिश ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में करीब 25 लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की. वो वीजा देने के बहाने लोगों से संपर्क करता था और फिर पैसे हनी ट्रैप या ब्लैकमेलिंग के जरिए उन्हें आईएसआई के लिए जासूसी करने को मजबूर करता था.
WhatsApp, Telegram के जरिए ISI के संपर्क में थी ज्योति
आपको बता दें इस साजिश का सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया. ज्योति के YouTube चैनल पर 3.77 लाख सब्सक्राइबर्स हैं. 2023 में वो वीजा के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन गई थी. जहां उसकी मुलाकात दानिश से हुई. दानिश ने उसे ISI के एजेंट अली हसान से मिलवाया. ज्योति ने 2023, 2024 और मार्च 2025 में तीन बार पाकिस्तान की यात्रा की. जांच में पता चला कि वो WhatsApp, Telegram और Snapchaat के जरिए ISI हैंडलर्स के संपर्क में थी और संवेदनशील जानकारी भेज रही थी.
UPI के जरिए मिलते थे 'जासूसों' को पैसे
बता दें ज्योति के अलावा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 12 और लोगों को गिरफ्तार किया गया जो दानिश केसंपर्क में थे. इनमें मलेर कोटला की गुजाला और यामीन मोहम्मद शामिल है. जिन्हें पंजाब पुलिस ने 11 मई को गिरफ्तार किया. गुजाला ने कबूल किया कि उसने भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी दानिश को दी और इसके बदले उसे पैसे यूपीआई के जरिए मिले. इन सभी ने सेना के कैंप, एयरबेस और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी गोपनीय जानकारी आईएसआई को भेजी थी.