मेरठ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग की राजनीति में प्रजापति समाज को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रजापति समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बसपा नेता दारासिंह प्रजापति ने सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। दारासिंह ने 2024 में बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उनके साथ समाज के कई अन्य प्रमुख लोगों ने भी सपा का दामन थामा।
दारासिंह के सपा में आने के बाद प्रजापति समाज के वोट बैंक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाज के जानकारों के मुताबिक, प्रदेश की करीब 50 विधानसभा सीटों पर इस समाज की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यही वजह है कि सपा के साथ भाजपा और बसपा भी इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
'पूरा पश्चिमी यूपी साथ लेकर आए हैं दारासिंह'
सपा में शामिल होने के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि दारासिंह प्रजापति पूरा समाज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साथ लेकर लखनऊ आए हैं। वहीं, दारासिंह ने कहा कि वह अपने लिए टिकट या किसी पद की मांग लेकर सपा में नहीं आए हैं। उनका उद्देश्य प्रजापति समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाना है।
उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। सपा में उन्हें अपने समाज के हितों की उम्मीद दिखाई देती है। दारासिंह ने अखिलेश यादव को पीडीए की सोच रखने वाला नेता बताते हुए कहा कि उनका तन, मन और धन पार्टी के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने समाज की समस्याओं को याद रखने और उसकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की अपील की।
403 सीटों पर मौजूदगी, 50 पर निर्णायक भूमिका का दावा
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और भाजपा के पूर्व ओबीसी मोर्चा क्षेत्रीय अध्यक्ष लोकेश प्रजापति के अनुसार, प्रजापति समाज की मौजूदगी प्रदेश के सभी क्षेत्रों में है। उनका दावा है कि समाज की आबादी करीब 40 लाख है और प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
समाज से जुड़े लोगों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 70 सीटों पर प्रजापति समाज के मतदाता मौजूद हैं, जबकि इनमें से कुछ सीटों पर उनका प्रभाव चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र में भी समाज की अच्छी मौजूदगी बताई जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में आबादी और मतदाताओं के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
भाजपा भी साध रही ओबीसी समीकरण
दारासिंह के सपा में जाने के बाद भाजपा की ओर से भी प्रजापति समाज के नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाने की चर्चा है। राजनीतिक दृष्टि से गैर-यादव ओबीसी मतदाता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। वहीं, सपा अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने के प्रयास में जुटी है। बसपा भी अपने परंपरागत सामाजिक समीकरणों के जरिए इस वर्ग को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
प्रजापति समाज से धर्मवीर प्रजापति प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि डॉ. मनोज प्रजापति हमीरपुर से विधायक हैं। समाज के नेताओं का कहना है कि आबादी और चुनावी प्रभाव के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभी पर्याप्त नहीं है।
समाज की तीन प्रमुख मांगें
प्रजापति समाज के प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में समाज को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करना, राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाना और पारंपरिक माटी कला व मिट्टी के शिल्प को संरक्षण देना शामिल है। समाज के लोग माटी कला बोर्ड को मजबूत करने और पारंपरिक रोजगार से जुड़े लोगों को सुविधाएं देने की मांग भी उठा रहे हैं।
इन सीटों पर प्रभाव का दावा
समाज के जानकारों के अनुसार, हमीरपुर, तिंदवारी, कालपी, बबेरू, कर्वी, अमेठी, कुंदरकी, मोदीनगर, आगरा दक्षिण, खतौली, अयाह शाह, निजामाबाद, गरौठा और झांसी सदर जैसी सीटों पर प्रजापति समाज की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब देखना होगा कि दारासिंह प्रजापति के सपा में आने से समाज का कितना समर्थन पार्टी को मिलता है और इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर किस तरह पड़ता है।