मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बदलने के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान हाईवे पर लंबा जाम लग गया और हालात बिगड़ने पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। घटना के बाद पार्टी संगठन और प्रशासन दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई।
टिकट बदलने के फैसले पर भड़का विरोध
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित होने के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी तेज हो गई। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने फैसले का विरोध करते हुए सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देर रात तक चले विरोध के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदर्शनकारियों ने नए प्रत्याशी के विरोध में नारे लगाए और पार्टी नेतृत्व से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। समर्थकों का कहना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया गया है।
हाईवे जाम हटाने पहुंची पुलिस, आंसू गैस के गोले छोड़े
प्रशासन के अनुसार प्रदर्शन के कारण करीब 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हुई। कई बसें और अन्य वाहन घंटों तक फंसे रहे। अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नहीं संभलने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर सड़क खाली कराई। प्रशासन का कहना है कि इस दौरान पथराव भी हुआ, जिसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत आठ पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं पुलिस ने लाठीचार्ज किए जाने के आरोपों से इनकार किया है।
कार्यकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप, कई घायल होने का दावा
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता घायल हुए और महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी कार्यालय में रोका गया और विरोध की आवाज दबाने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे नरोत्तम मिश्रा को ही उम्मीदवार बनाए जाने की मांग पर कायम हैं।
जिलाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा
विवाद के बीच बीजेपी जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने कई पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को एकतरफा बताते हुए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि तय समय में उम्मीदवार बदलने पर विचार नहीं किया गया तो प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद संगठन के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
उपचुनाव से पहले संगठनात्मक चुनौती बढ़ी
दतिया में सामने आए इस घटनाक्रम ने उपचुनाव से पहले पार्टी की रणनीति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नाराज कार्यकर्ता अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व असंतोष दूर करने के लिए कोई नया निर्णय लेता है या मौजूदा उम्मीदवार के साथ ही चुनावी मैदान में उतरता है। आने वाले दिनों में दतिया की राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।