दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर लंबे समय तक चले प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसक घटनाओं के बाद पुलिस ने 27 नामजद नेताओं समेत 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। घटना के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी और नजरबंदी की कार्रवाई भी की गई है, जबकि राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ बड़ा मामला
दतिया में उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार शाम से शनिवार तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर करीब 11 घंटे तक यातायात बाधित रखा। प्रशासन का कहना है कि इस दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत 27 नामजद नेताओं और करीब 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की पहचान भी की जा रही है।
कई लोगों की गिरफ्तारी, कुछ को किया नजरबंद
पुलिस के अनुसार मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि कुछ लोगों को एहतियात के तौर पर नजरबंद किया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई। वहीं राजनीतिक स्तर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी हालात को सामान्य करने की कोशिश में जुटे हैं ताकि उपचुनाव से पहले विवाद को शांत किया जा सके।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों और पुलिस बल पर पथराव किया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। दूसरी ओर प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का दावा है कि विवाद की शुरुआत पुलिस की कार्रवाई से हुई, जिसके बाद हालात बिगड़ गए। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा और शांति भंग करने के आरोप लगा रहे हैं।
अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के घायल होने का दावा
प्रशासन के अनुसार घटना में पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। जिला प्रशासन ने भी अधिकारियों पर पथराव की बात कही है। वहीं प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का दावा है कि उनके कई पदाधिकारी और महिला कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं। दोनों पक्षों ने वाहनों में तोड़फोड़ के आरोप भी एक-दूसरे पर लगाए हैं, जिसकी जांच की जा रही है।
संगठन के सामने चुनौती बनी नाराजगी
घटना के बाद संगठन के भीतर असंतोष को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ स्तर पर मतभेदों को दूर करने और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। हालांकि जमीनी स्तर पर कई कार्यकर्ताओं की नाराजगी अभी पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है। ऐसे में उपचुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।