मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दतिया से कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के 25 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया है। अब सभी की नजरें आज होने वाले सजा के फैसले पर टिकी हैं। इस फैसले से न सिर्फ उनकी विधायकी खतरे में है, बल्कि राज्य में कांग्रेस की स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
25 साल पुराने मामले में दोष सिद्ध
दतिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़े एक पुराने धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया गया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद बुधवार को उन्हें दोषी करार दिया। यह मामला करीब 25 साल पुराना बताया जा रहा है, जिसने अब जाकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
आज होगा सजा पर फैसला
कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद अब गुरुवार को सजा पर फैसला सुनाया जाएगा। अगर उन्हें दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो सकती है। इस कारण यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
विधायकी पर लटक रही तलवार
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। ऐसे में भारती की विधायकी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति में सीट रिक्त घोषित कर उपचुनाव कराए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
कांग्रेस के लिए बढ़ी मुश्किलें
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 65 विधायक हैं। ऐसे में एक और विधायक के संकट में आने से पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है। पहले से ही विजयपुर विधायक Mukesh Malhotra का मामला न्यायालय में लंबित है, जिससे पार्टी की चिंता और बढ़ गई है।
अन्य विधायकों के मामले भी चर्चा में
सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे से जुड़ा दलबदल मामला भी अभी अदालत में विचाराधीन है। इस तरह लगातार कानूनी चुनौतियों के चलते कांग्रेस को राजनीतिक मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी नजरें राजेंद्र भारती की सजा और उसके राजनीतिक प्रभाव पर टिकी हैं।