De De Pyar De : बॉलीवुड में आख़िरी कुछ सालों से बॉक्स ऑफिस की हवा लगातार बदल रही है. ऐसे दौर में जब बड़े सितारों की फ़िल्में भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पातीं, वहीं मिड-बजट और कंटेंट-ड्रिवन फ़िल्में भी एक अच्छी कमाई कर रही हैं। इसी बीच ‘दे दे प्यार दे 2’ ने अपनी रिलीज़ के कुछ हफ़्तों में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया, जो आज के समय में एक अच्छी उपलब्धि मानी जाती है। फिर भी यह सवाल उठ रहा है कि इतनी कमाई के बावजूद फिल्म को ‘हिट’ क्यों नहीं कहा जा रहा? आइए समझते हैं पूरी कहानी.
1. 100 करोड़ क्लब में एंट्री, लेकिन सफ़र आसान नहीं
‘दे दे प्यार दे 2’ ने शुरुआत से ही धीमी रफ्तार पकड़ी. रिलीज़ के पहले दिन फिल्म की कमाई उम्मीदों से कम रही, हालांकि वीकेंड पर दर्शकों का रुझान बढ़ा और वर्ड ऑफ माउथ ने इसे संभाल लिया। फिल्म ने स्टेप-बाय-स्टेप ग्रोथ दिखाते हुए 100 करोड़ तक का सफर तय किया। आज की परिस्थिति में, जब मल्टीप्लेक्स फुटफॉल कम हो रहे हैं और OTT की वजह से दर्शकों की पसंद बदली है, ऐसे में 100 करोड़ की कमाई को कम नहीं आंका जा सकता। लेकिन सिर्फ इस नंबर से फिल्म को हिट घोषित नहीं किया जा सकता.
2. बजट और रिकवरी का खेल
किसी भी फिल्म को हिट मानने का सबसे बड़ा पैमाना होता है, उसका बजट और उसके मुकाबले की कमाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘दे दे प्यार दे 2’ का कुल बजट, प्रमोशन और मार्केटिंग मिलाकर, काफी बड़ा माना जा रहा है। ऐसे में फिल्म के लिए केवल 100 करोड़ कमाना काफी नहीं है; उसे अपने लागत से लगभग दोगुनी कमाई करनी चाहिए ताकि उसे बॉक्स ऑफिस पर "हिट" माना जाए। अभी फिल्म ने अपने प्रोडक्शन कॉस्ट की भरपाई का आधा हिस्सा ही छुआ है, इसलिए यह सिर्फ "औसत" या "ठीक-ठाक" प्रदर्शन के रूप में दर्ज की जा रही है.
3. कंटेंट पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
फ़िल्म की कहानी और प्रस्तुति पर दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही। कुछ लोगों ने फिल्म के हास्य और परिवार-केन्द्रित भावनाओं की तारीफ़ की, वहीं कई दर्शकों ने स्क्रिप्ट में रिपीटेशन और प्रेडिक्टेबल मोमेंट्स की कमी को उजागर किया। आज के दर्शक क्लटर से हटकर कुछ नया देखना चाहते हैं, और यही वजह है कि फिल्म बड़े स्तर पर "पैनिक बाय" यानी टिकट खिड़की पर अचानक भीड़ खींचने में नाकाम रही। यही कारण है कि इसकी कमाई स्थिर रही, लेकिन तेज उछाल नहीं आया जो एक फिल्म को सुपरहिट बना देता है.
4. प्रतियोगिता और मार्केट की बदलती धारा
फिल्म की रिलीज़ ऐसे समय में हुई जब कई बड़ी और अलग-अलग जनर की फिल्में पहले से ही सिनेमाघरों में मौजूद थीं। इस वजह से ‘दे दे प्यार दे 2’ को शो काउंट और स्क्रीन शेयरिंग में सीधी चुनौती मिली। इसके साथ OTT के बढ़ते प्रभाव ने भी दर्शकों को थिएटर तक लाने में मुश्किलें पैदा कीं। मल्टीप्लेक्स संस्कृति में कई दर्शक अब फिल्मों को वेट-एंड-वॉच मोड में देखते हैं—यानी वे इंतज़ार करते हैं कि फिल्म का रिव्यू कैसा है और क्या इसे देखना जरूरी है या नहीं। यही संकोच इसकी ओवरऑल कमाई के ग्राफ को धीमा कर गया।
5. हिट बनने की उम्मीद बरकरार
हालांकि फिल्म अभी "हिट" नहीं मानी जा रही, लेकिन इसका सफर खत्म नहीं हुआ है। धीरे-धीरे स्टेडी कलेक्शन और परिवारिक दर्शकों की पसंद के चलते फिल्म आने वाले हफ्तों में अपनी लागत निकाल सकती है। अगर आने वाले दिनों में कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ नहीं होती या प्रतिस्पर्धा कम रहती है, तो यह फिल्म अपने बॉक्स ऑफिस फाइनल में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। निर्माता और ट्रेड एनालिस्ट अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि ‘दे दे प्यार दे 2’ लंबी रेस में खुद को साबित करे और अपनी कलेक्शन के दम पर हिट का टैग हासिल कर ले.