Candida Auris: अमेरिका में 'कैंडिडा ऑरिस' (Candida auris) नाम का एक जानलेवा फंगस तेजी से फैल रहा है। इस फंगस पर आम दवाएं असर नहीं करती और इलाज के विकल्प बेहद सीमित हैं। इस फंगस के फैलने को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तेजी से फैल रहा है। यह ज़्यादातर उन लोगों को प्रभावित करता है जो पहले से ही बहुत बीमार हैं।
कितने मामले किए गए दर्ज
आपको बता दें कि अमेरिका में इस फंगस का पहला मामला 2013 में दर्ज किया गया था। जिसके बाद से इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, 25 जुलाई तक अमेरिका के 27 राज्यों में कैंडिडा ऑरिस के 3,437 मामले सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा असर कैलिफ़ोर्निया में सबसे ज़्यादा 873 मामले दर्ज किए गए हैं, इसके बाद टेक्सास में 433 और टेनेसी में 283 मामले सामने आए हैं।
अमेरिका के लिए चिंता का विषय
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, इरविन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में संक्रामक रोगों की प्रोफ़ेसर सुज़ैन हुआंग, MD ने बताया कि इस फंगस का तेजी से फैलना अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। लोगों को निश्चित रूप से इस चिंता के बारे में पता होना चाहिए और यह भी पता होना चाहिए कि इसका उन पर या उनके प्रियजनों पर क्या असर पड़ सकता है।
कैंडिडा ऑरिस क्या है
कैंडिडा ऑरिस एक प्रकार का यीस्ट है जो गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। यह उन लोगों में पहले फैलता है, जो पहले से ही गंभीर रूप से बीमार हैं या फिर जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है। ऑरिस की खोज सबसे पहले 1996 में कोरियाई शोधकर्ताओं ने की थी और 2009 में जापान में इसे आधिकारिक तौर पर एक नई प्रजाति के रूप में पहचाना गया था। अमेरिका में इसके बारे में सबसे पहले 2016 में पता चला था।
क्यों खतरनाक है कैंडिडा ऑरिस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कैंडिडा ऑरिस को एक 'क्रिटिकल-प्रायोरिटी फंगल पैथोजन' बताता है, जो कई तरह के संक्रमण पैदा कर सकता है। बता दें, हमारे शरीर की सफेद रक्त कोशिकाएं रोगापुणों को मारने के लिए जो तत्व बनाती हैं, यह फंगस उनके उत्पादन को ही रोक देता है। जिससे त्वचा का संक्रमण और गंभीर, जानलेवा संक्रमण हो सकता है।
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किन लोगों को है ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति के लिए इस फंगस से खतरा न के बराबर है। हालांकि यह उन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, जो पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार जिन लोगों को डायबिटीज, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे ब्लड कैंसर हैं, या जिनकी इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर है, उन्हें कैंडिडा ऑरिस का संक्रमण होने का खतरा रहता है। जो लोग लंबे समय से नर्सिंग होम, आईसीयू में हैं या जिन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, उन्हें भी इस फंगस के संक्रमण का खतरा हो सकता है।
कितना है मृत्यु दर
आंकड़ों के अनुसार इससे संक्रमित होने वाले मरीजों में मृत्यु दर 30% से 60% के बीच है। चूंकि कैंडिडा ऑरिस से संक्रमित ज़्यादातर मरीज़ पहले से ही बीमार होते हैं, इसलिए जब कैंडिडा ऑरिस से संक्रमित मरीज़ों की मौत होती है, तो यह पता लगाना मुश्किल होता है कि उनकी मौत में कैंडिडा ऑरिस की कितनी भूमिका थी।
दवाएं नहीं करती है असर
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के अनुसार, इस फंगस पर ज्यादातर एंटीफंगल दवाएं बेअसर साबित होती हैं। यह गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह फंगस कई बार इंसान के शरीर पर बिना कोई लक्षण दिखाए मौजूद रहता है, जिससे इसका एक व्यक्ति से दूसरे में फैलना आसान हो जाता है।
कैसे फैलता है फंगस
यह फंगस अस्पतालों में बेड की रेलिंग, दरवाजों के हैंडल और अन्य सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है और स्पर्श के जरिए फैलता है। इस फंगस का कोई एक खास लक्षण नहीं है। संक्रमित व्यक्ति को बुखारा आना और कंपकंपी छूटना जैसे सामान्य लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें पहचानना मुश्किल होता है।