ऑनलाइन दुनिया में वायरल होने वाले गेम और चैलेंज कभी-कभी मनोरंजन से आगे बढ़कर खतरनाक मोड़ ले लेते हैं। गाजियाबाद में तीन किशोर बहनों की आत्महत्या के बाद एक कथित ‘कोरियन लवर’ गेम को लेकर जांच शुरू हुई है। यह मामला एक बार फिर उन डिजिटल ट्रेंड्स पर सवाल खड़े कर रहा है, जो मासूम दिमागों को जोखिम भरे फैसलों की ओर धकेल सकते हैं।
गाजियाबाद की घटना से उठा सवाल
गाजियाबाद की एक रिहायशी सोसाइटी में तीन बहनों द्वारा ऊंची इमारत से छलांग लगाने की घटना ने सभी को झकझोर दिया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आत्महत्या के पीछे असली कारण क्या था। प्रारंभिक जांच में एक ऑनलाइन गेम या चैलेंज का नाम सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर टास्क पूरे करने होते थे। परिवार का कहना है कि उन्हें इस गतिविधि की भनक तक नहीं लगी थी।
‘कोरियन लवर’ गेम की जांच
मृतक लड़कियों के परिजनों ने बताया कि उनकी बेटियां एक ऑनलाइन गेम खेल रही थीं, जिसमें करीब 50 टास्क पूरे करने का दावा किया जा रहा है। सबसे छोटी बहन को गेम में लीडर बताया गया था और तीनों मिलकर चुनौती पूरी कर रही थीं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस गेम का सीधा संबंध घटना से है या नहीं, लेकिन जांच एजेंसियां हर डिजिटल कड़ी खंगाल रही हैं।
ब्लू व्हेल: सबसे चर्चित खतरनाक ट्रेंड
जब भी जानलेवा ऑनलाइन चैलेंज की बात होती है, सबसे पहले ब्लू व्हेल का नाम सामने आता है। वर्ष 2016-17 में दुनिया के कई हिस्सों में चर्चा में आया यह कोई आधिकारिक ऐप नहीं था, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाला 50 दिनों का टास्क-आधारित ट्रेंड था। इसमें खुद को नुकसान पहुंचाने, नींद न लेने और अंततः आत्महत्या जैसे खतरनाक निर्देश दिए जाने की रिपोर्टें सामने आई थीं।
किकी और मोमो जैसे वायरल चैलेंज
2018 में किकी चैलेंज ने भी लोगों को जोखिम में डाला, जिसमें चलती कार से उतरकर डांस करने की कोशिश के दौरान कई लोग घायल हुए। उसी दौर में मोमो चैलेंज की चर्चा भी हुई, जहां कथित तौर पर बच्चों को डराने-धमकाने वाले संदेश भेजे जाते थे और नुकसान पहुंचाने वाले टास्क दिए जाते थे। हालांकि सभी मामलों में वास्तविक क्षति की पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन चेतावनियां जरूर जारी की गई थीं।
कैसे फैलते हैं ऐसे डिजिटल जाल
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे चैलेंज किसी ऐप स्टोर से डाउनलोड नहीं होते, बल्कि सोशल मीडिया ग्रुप, निजी चैट या ऑनलाइन कम्युनिटी के जरिए फैलते हैं। प्रतिभागियों को धीरे-धीरे मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है ताकि वे केवल अगला टास्क पूरा करने पर ही ध्यान दें। यही मनोवैज्ञानिक दबाव इन्हें खतरनाक बना देता है। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने और खुलकर संवाद करने की जरूरत बताई जा रही है।