Decision on BulldozerAction Deferred: इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुलडोजर कार्रवाई की वैधता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो न्यायाधीशों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद अब मामला तीसरी बेंच को भेज दिया गया है। हमीरपुर से जुड़े इस प्रकरण में खंडपीठ किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अब तीसरे न्यायाधीश की राय के आधार पर अंतिम फैसला होगा, जिसका असर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
एफआईआर के आधार पर ध्वस्तीकरण पर उठे सवाल
न्यायमूर्ति अतुल श्रीवास्तव ने अपनी राय में कहा कि केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति का मकान गिराना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि सामान्य परिस्थितियों में एफआईआर दर्ज होने के बाद दो वर्ष तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। हालांकि सार्वजनिक भूमि को खाली कराने जैसी विशेष परिस्थितियों को उन्होंने अपवाद माना। इसके अलावा तीन वर्ष या उससे अधिक पुराने कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से पहले एक वर्ष का नोटिस देने की भी बात कही।
दूसरे न्यायाधीश ने जताई असहमति
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने इन सुझावों से असहमति जताते हुए कहा कि अदालत इस तरह की निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकती। उनके अनुसार, यदि ऐसा निर्देश दिया गया तो संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा आ सकती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक समान समय-सीमा लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।
अब तीसरे जज की राय होगी अहम
दोनों न्यायाधीशों के बीच मतभेद सामने आने के बाद मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है, ताकि इसे तीसरे न्यायाधीश की बेंच को सौंपा जा सके। तीसरे जज इस बात पर अपनी राय देंगे कि क्या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत राज्य सरकार की ध्वस्तीकरण संबंधी कार्रवाई पर समय-सीमा तय कर सकती है और क्या कार्रवाई शुरू करने से पहले एक वर्ष का नोटिस देना आवश्यक बनाया जा सकता है।
प्रदेशभर के मामलों पर पड़ सकता है असर
यह मामला उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े कई मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी अदालत प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर अपनी चिंता जता चुकी है। अब तीसरी बेंच के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए क्या दिशा-निर्देश लागू होंगे।