Womens Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर शुक्रवार को लंबी बहस के बाद वोटिंग कराई गई, लेकिन बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका। सरकार को विपक्ष का समर्थन नहीं मिलने के कारण यह महत्वपूर्ण विधेयक पास नहीं हो पाया। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
पक्ष-विपक्ष में पड़े इतने वोट
वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत, यानी 352 वोटों की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हो सकी।
अन्य विधेयकों की प्रक्रिया भी रुकी
सरकार ने इस बिल के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ भी पेश किए थे। लेकिन मुख्य संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद इन दोनों विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि ये सभी बिल आपस में जुड़े हुए हैं।
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राजनीतिक टकराव
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने लगातार विरोध जताया, जबकि सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने समर्थन की अपील की। अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है, जबकि विपक्ष ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाए।
आगे क्या होगा?
बिल के पास न हो पाने के बाद अब महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में फिर से इस दिशा में प्रयास कर सकती है, जबकि विपक्ष अपनी आपत्तियों को लेकर कायम है।