कुलदीप सिंह सेंगर की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला अभी तक नहीं आया है, लेकिन कोर्ट ने उनकी अपील पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है। सेंगर ने अपनी 10 साल की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी है। उनकी सजा निलंबित करने की याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा।
पिता की पुलिस हिरासत में मौत
कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ कई गंभीर आरोप हैं। 2017 में नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप है। पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया है। पीड़िता के पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। नाबालिग से रेप के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं।
नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराया
कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद, 20 दिसंबर 2019 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सेंगर ने इस सजा के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसने उनकी सजा को निलंबित कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है ।
शरीर पर 14 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे
उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी, जो 9 अप्रैल 2018 को हुई थी। पीड़िता के पिता को 3 अप्रैल 2018 को हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और जेल भेज दिया गया था। उनकी मौत के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 14 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पीड़िता का आरोप था कि कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर पुलिस और उसके समर्थकों ने उनके पिता को इतना पीटा कि उनकी जान चली गई। इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई अतुल सिंह सेंगर समेत पांच अन्य लोगों को 10 साल की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी है ।