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Deepak Sharma the policeman : देश की सबसे प्रतिष्ठित जेलों में से एक, तिहाड़ जेल, अपने प्रशासनिक ढांचे और मानवतावादी दृष्टिकोण के लिए जानी जाती है. इस संस्थान में अनुशासन, सुरक्षा और सुधारात्मक कार्यों के साथ-साथ कैदियों के आत्म-सम्मान और उनके कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. इसी क्रम में तिहाड़ जेल के शायख़ अधिकारी दीपक शर्मा ने अपने समर्पण और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए हाल ही में ‘स्वाभिमान खेल रत्न’ से सम्मानित होकर एक नई मिसाल कायम की है.
तिहाड़ जेल के शायख़ अधिकारी दीपक शर्मा को ‘स्वाभिमान खेल रत्न’ सम्मान
दीपक शर्मा की पहचान केवल एक सख्त अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और दूरदर्शी प्रशासक के रूप में भी है. उनका मानना है कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियाँ कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने जेल परिसर में कई खेल और रचनात्मक गतिविधियों की पहल की, जिससे कैदियों में अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक सोच का विकास हुआ.
‘स्वाभिमान खेल रत्न’ पुरस्कार उनके उन प्रयासों की सराहना है, जिन्होंने जेल प्रशासन के पारंपरिक दृष्टिकोण को बदलकर सुधारात्मक और सशक्तिकरण की दिशा में नई राह दिखाई. दीपक शर्मा के नेतृत्व में, तिहाड़ जेल ने न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि मानवता और पुनर्वास की मिसाल भी कायम की. यह सम्मान दीपक शर्मा के करिश्माई नेतृत्व, मेहनत और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण ने यह साबित कर दिया है कि अनुशासन और संवेदनशीलता का संगम किसी भी संस्था को समाज के लिए एक उदाहरण बना सकता है.