देश में चुनावी माहौल के बीच सोशल मीडिया पर फर्जी और एआई-जनित वीडियो का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के नाम से वायरल हो रहे डीपफेक वीडियो और फर्जी पत्रों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इन घटनाओं ने डिजिटल जानकारी की विश्वसनीयता और चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी वीडियो का फैलता जाल
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें मोहन भागवत को विवादित बयान देते हुए दिखाया गया, जैसे “सेना का भगवाकरण करना है”। जांच में सामने आया कि ये वीडियो एआई तकनीक से बनाए गए डीपफेक हैं, जिनका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है।
डीपफेक तकनीक का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार अब एआई की मदद से चेहरे के हावभाव, आवाज और वीडियो को आसानी से बदलकर नकली सामग्री बनाई जा सकती है। इससे गलत सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं और जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
संघ की ओर से चेतावनी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा है कि उनके नाम और नेताओं को निशाना बनाकर सुनियोजित डिजिटल दुष्प्रचार किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि यह सब राजनीतिक लाभ और जनता को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेज भी वायरल
एक कथित पत्र में मोहन भागवत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बयान दिखाया गया था, जिसे संघ ने पूरी तरह फर्जी बताया। ऐसे कई दस्तावेज सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रसारित किए जा रहे हैं।
सतर्क रहने की अपील
विशेषज्ञों और संगठन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या संदेश को बिना सत्यापन के साझा न करें। डिजिटल युग में इस तरह की गलत जानकारी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है।