दिल्ली में हो रही पुतिन–मोदी शिखर मुलाकात सिर्फ कूटनीति की औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की रक्षा क्षमता में ‘सुपर बूस्ट’ देने वाली ऐतिहासिक वार्ता मानी जा रही है। फोकस उन हथियारों और सिस्टम्स पर है जो आने वाले दशक में भारत की सुरक्षा को पूरी तरह बदल सकते हैं—Su-57 स्टील्थ जेट, S-500 प्रोमिथियस, ब्रह्मोस-NG, Su-30MKI अपग्रेड और नए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मॉडल। डिफेंस सेक्टर में आज भारी हलचल रहने के संकेत हैं।
पुरानी दोस्ती, नए रणनीतिक संकेत
रूस के राष्ट्रपति के दिल्ली आगमन के साथ ही दोनों देशों के बीच दशक पुराने रक्षा रिश्ते को और गहरा करने की तैयारी तेज है। भारत के लिए यह सम्मेलन खास है क्योंकि पिछले वर्षों में वायुसेना के स्क्वाड्रन कम हुए हैं और हाई-एंड प्लेटफॉर्म की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। रूस ने इस बार टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और लोकल प्रोडक्शन को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है।
Su-57: भारत की फिफ्थ-जनरेशन छलांग
रूसी Su-57 ‘फेलॉन’ दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर्स में से एक है। भारत दो स्क्वाड्रन यानी लगभग 84 जेट खरीदने को लेकर गंभीर है।
प्रति जेट अनुमानित कीमत: लगभग 30 करोड़ डॉलर
सुपरक्रूज, मल्टी-रोल मिसाइल सिस्टम, स्टील्थ कोटिंग इसकी खासियत
रूस ने 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की है, जिससे भारत में ही इसका बड़े पैमाने पर निर्माण संभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वदेशी AMCA आने तक एक महत्वपूर्ण ‘गैप-फिलर’ साबित होगा।
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S-500 प्रोमिथियस: भारत की आसमान ढाल
भारत पहले से S-400 सिस्टम का उपयोग कर रहा है, लेकिन S-500 उससे कई स्तर ऊपर है।
रेंज: 600 किमी
क्षमता: हाइपरसोनिक मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लो-ऑर्बिट सैटेलाइट तक को भेदने की क्षमता
भारत लगभग 5.4 अरब डॉलर का पैकेज चाहता है जिसमें 60% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल है। यह डील भारत की एयर-डिफेंस को नए युग में ले जाएगी।
अन्य बड़े सौदे: ब्रह्मोस-NG से Su-30 अपग्रेड तक
ब्रह्मोस-NG: 800 किमी रेंज, दो नई रेजिमेंट
Su-30MKI अपग्रेड: लगभग 100 जेट का मेजर अपग्रेड
अतिरिक्त S-400 मिसाइलें, R-37 एयर-टू-एयर मिसाइलें, फ्रिगेट्स, टैंक्स
ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में भारत-रूस संयुक्त उत्पादन शामिल है, जिससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी।
मार्केट रिएक्शन: डिफेंस सेक्टर में जोश
डिफेंस कंपनियों के शेयरों में पहले से उछाल है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि Su-57 और S-500 पर आधिकारिक घोषणा होते ही डिफेंस इंडेक्स में 20-30% तेजी देखने को मिल सकती है। भारत की वायुसेना के स्क्वाड्रन गैप को भरने में ये डील निर्णायक होंगी।
भारत का स्पष्ट संदेश: रणनीति हम तय करेंगे
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारत ने साफ संकेत दिया है कि उसकी रक्षा नीति केवल उसकी जरूरतों के हिसाब से तय होगी। यह सम्मेलन एशिया-प्रशांत के रणनीतिक समीकरणों पर भी बड़ा असर डालेगा।