Delhi blasts: लखनऊ के विकास नगर में रहने वाली 74 साल की उषा शुक्ला एक खतरनाक साइबर ठगी का शिकार होते-होते बच गईं। ठगों ने उन्हें फोन कर यह कहकर डराया कि उनके बैंक खाते से दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आतंकियों को फंडिंग की गई है और वह मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस चुकी हैं। खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले कॉलर ने गिरफ्तारी और डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। डर और दबाव में आई महिला से 1.14 करोड़ रुपये की मांग की गई। ठगों के झांसे में आकर महिला अपनी 12 एफडी तुड़वाने पंजाब नेशनल बैंक की विकास नगर शाखा तक पहुंच गईं, लेकिन वहां बैंक अधिकारियों की सतर्कता ने उनकी जिंदगी भर की कमाई बचा ली।
धमकी से घबराकर बैंक पहुंची महिला
घटना 11 दिसंबर की है, जब उषा शुक्ला को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खातों से संदिग्ध लेन-देन हुआ है और जल्द गिरफ्तारी होगी। परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उनसे बैंक खातों और एफडी की जानकारी ली गई। लगातार डर के माहौल में रखकर ठगों ने महिला को निर्देश दिया कि वह तुरंत पैसा ट्रांसफर कराए। घबराई हुई उषा शुक्ला 1.14 करोड़ रुपये की एफडी लेकर बैंक पहुंचीं। इतनी बड़ी रकम निकालने की बात सुनते ही बैंक अधिकारियों को शक हुआ, क्योंकि महिला बेहद घबराई हुई थीं और सवालों के ठीक जवाब नहीं दे पा रही थीं।
बैंक की समझदारी से बची जमा पूंजी
शक गहराने पर बैंक अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए जानबूझकर गलत खाता विवरण डाला और महिला को बाहर भेजा। इसी दौरान उन्होंने देखा कि महिला फोन पर किसी से धीमी आवाज में बात कर रही हैं। बातचीत के बाद पूरी सच्चाई सामने आई। बैंक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और महिला के अन्य खातों को सुरक्षित किया गया। जांच में पता चला कि ठगों ने महिला का मोबाइल भी हैक कर रखा था और वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी दिखाकर डराया जा रहा था। उषा शुक्ला ने बैंक कर्मचारियों का आभार जताते हुए कहा कि उनकी समझदारी से उनकी पूरी जमा पूंजी बच गई। यह मामला साइबर ठगी के बढ़ते खतरे और सतर्कता की जरूरत की बड़ी चेतावनी है।