नई दिल्ली। शादीशुदा रिश्ते में दखल देने वालों के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का एक अहम फैसला मिसाल बन सकता है। राजधानी में एक महिला ने अपने पति की गर्लफ्रेंड पर 1 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगते हुए मुकदमा दायर किया। महिला का आरोप है कि गर्लफ्रेंड ने जानबूझकर उसकी शादीशुदा जिंदगी में हस्तक्षेप किया और घर तोड़ दिया। कोर्ट ने इस याचिका को सुनने योग्य मानते हुए कहा कि शादी में हस्तक्षेप करने पर पति या पत्नी सिविल कोर्ट में जाकर हर्जाने की मांग कर सकते हैं।
कोर्ट ने माना महिला का दर्द
महिला ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी शादी 2012 में हुई थी और दो बच्चे भी हैं। लंबे समय तक सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन 11 साल बाद 2023 में उसे पति के अवैध संबंधों की जानकारी मिली। इसके बाद उसने पति की कथित प्रेमिका पर जानबूझकर घर तोड़ने का आरोप लगाते हुए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की। कोर्ट ने पति और गर्लफ्रेंड दोनों को समन जारी कर दिया और कहा कि ऐसा मामला फैमिली कोर्ट में नहीं, बल्कि दीवानी न्यायालय (Civil Court) में सुना जाएगा।
अवैध संबंधों को माना शादी में हस्तक्षेप
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि शादी में हस्तक्षेप करने वाले के खिलाफ हर्जाने की मांग करना कानून के दायरे में है। अदालत ने स्नेह और वैवाहिक संबंधों के महत्व को स्वीकार करते हुए साफ किया कि पति या पत्नी को अपने निजी रिश्तों में दखल देने वाले से मुआवजे की मांग करने का अधिकार है।
महिला का आरोप और दर्द
महिला का कहना है कि वह अपने पति के प्यार, स्नेह और साथ की हकदार थी। लेकिन गर्लफ्रेंड ने जानते हुए भी उसके पति से रिश्ता कायम किया। पति ने संबंध खत्म करने से इनकार कर दिया और गर्लफ्रेंड के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आने लगा। इससे महिला की वैवाहिक जिंदगी पूरी तरह टूट गई।
समाज के लिए नई मिसाल
यह मामला उन लोगों के लिए रास्ता खोल सकता है जिनकी शादी अवैध संबंधों की वजह से टूट गई है। अदालत का यह फैसला बताता है कि पीड़ित पक्ष अब सीधे सिविल कोर्ट में जाकर हर्जाने की मांग कर सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट आदेश