दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक और बड़ा सुराग मिला है। एजेंसी ने आरोपी डॉ. शाहीन के कमरे नंबर 22 में छापेमारी के दौरान 18 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। यह रकम एक साधारण पॉलीथिन बैग में अलमारी में छुपाई गई थी। NIA अब यह पता लगाने में जुटी है कि शाहीन के पास इतनी बड़ी नकदी कहां से आई। जांच में उभर रहे शाहीन और मुजम्मिल के संबंध इस मॉड्यूल की गहराई को उजागर कर रहे हैं।
अलमारी
में मिली भारी नकदी
NIA टीम ने डॉ. शाहीन के ठिकाने पर छापेमारी करते हुए बड़ी मात्रा में कैश जब्त किया। 18 लाख रुपये की यह रकम साधारण पॉलीथिन में छिपाकर रखी गई थी। जांच एजेंसी अब इस धन के स्रोत को खंगाल रही है, क्योंकि शाहीन ने इसी साल सितंबर में कैश देकर एक ब्रेज़ा कार खरीदी थी। यह सवाल अब बड़ा हो गया है कि एक डॉक्टर के पास इतने कैश का जखीरा आखिर कहां से आया?
शाहीन
और मुजम्मिल की नजदीकियां: साजिश
की कड़ी?
फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े दोनों डॉक्टर—शाहीन और मुजम्मिल—का संबंध अब जांच के केंद्र में है। मुजम्मिल शकील के कबूलनामे ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसकी मुलाकात शाहीन से यूनिवर्सिटी में हुई, और नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि दोनों ने 2023 में निकाह कर लिया।
शाहीन का अतीत भी विवादों से भरा रहा है—पहले पति से अनबन, दूसरे पति से तलाक और फिर मुजम्मिल के करीब आना। इन घटनाओं ने इस टेरर मॉड्यूल की कहानी और भी पेचीदा कर दी है।
मुजम्मिल
के तीन ठिकाने और
नई जानकारियां
जांच में सामने आया है कि मुजम्मिल गनई के फरीदाबाद में तीन अलग-अलग ठिकाने थे—फतेहपुर टागा, धौज गांव और खोरी जमालपुर। खोरी जमालपुर में उसने पूर्व सरपंच से किराए पर मकान लिया था और खुद को कश्मीरी फल व्यापारी बताया था। मकान मालिक के अनुसार, वह हर महीने किराया देता था और तीन महीने बाद “ज्यादा गर्मी” का बहाना देकर घर छोड़ गया था। इन ठिकानों की जांच अब पूरी तरह NIA के रडार पर है।
विस्फोटक
सामग्री की आवाजाही का
खुलासा
मुजम्मिल की गतिविधियों से पता चला है कि उसने 12 दिनों तक भारी मात्रा में विस्फोटक एक किसान के कमरे में रखा और बाद में इसे मौलवी इश्तियाक के घर शिफ्ट कर दिया।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन विस्फोटकों की सप्लाई कहां से हुई और कितनी मात्रा में था।
जांच अब किन बिंदुओं पर फोकस?
क्या तीनों ठिकानों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया?
बरामद कैश का असली स्रोत क्या है?
विस्फोटक सामग्री कहां से आई?
क्या मॉड्यूल में और लोग शामिल हैं?
दिल्ली ब्लास्ट केस अब एक बड़े व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क के खुलासे की ओर बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।