दिल्ली की जहरीली होती हवा ने सरकार को इमरजेंसी मोड में ला दिया है। बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए राजधानी में वाहनों को लेकर अब तक का सबसे कड़ा फैसला लागू कर दिया गया है। गुरुवार से दिल्ली की सीमाओं पर सख्ती साफ दिखी, जहां BS-6 मानक से कम इंजन वाली गाड़ियों को एंट्री नहीं मिली। नियमों के आगे आम आदमी ही नहीं, खास लोग भी बेबस नजर आए।
BS-6 नहीं तो दिल्ली में एंट्री नहीं
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए साफ संदेश दे दिया है—अब राजधानी में वही वाहन चलेंगे जो BS-6 मानकों पर खरे उतरते हैं। 1 अप्रैल 2020 से पहले रजिस्टर्ड और BS-6 से नीचे के इंजन वाली गाड़ियों को दिल्ली बॉर्डर से ही वापस मोड़ा जा रहा है। पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें बॉर्डर पर तैनात हैं और बिना किसी रियायत के नियम लागू किए जा रहे हैं।
बॉर्डर पर बढ़ी सख्ती, लोग परेशान
नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम से दिल्ली आने वाले हजारों वाहन चालकों को लौटना पड़ा। कई लोगों का कहना है कि अचानक लागू हुए नियमों से रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गई है। हालांकि प्रशासन का तर्क है कि दिल्ली की हवा इस वक्त ‘आपात स्थिति’ में है और कठोर कदम जरूरी हैं।
VIP स्टिकर भी नहीं दिला सका राहत
सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक विधायक का स्टीकर लगी गाड़ी का भी चालान काटा गया। ड्राइवर ने बताया कि वह झांसी से विधायक को लेने जा रहा था, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए पुलिस ने वाहन को वापस भेज दिया। ग्रैप-4 के तहत यह कार्रवाई की गई, जिससे साफ है कि नियम सबके लिए बराबर हैं।
‘नो PUC, नो फ्यूल’ भी लागू
सरकार ने सिर्फ एंट्री पर ही नहीं, बल्कि ईंधन पर भी शिकंजा कस दिया है। जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। नंबर प्लेट रीडर कैमरे, वॉयस अलर्ट सिस्टम और पुलिस की मदद से इस नियम को लागू किया जा रहा है। राजधानी और सीमाओं पर सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
इन वाहनों को मिली छूट
सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन, एंबुलेंस, आवश्यक सेवाओं और जरूरी सामान ढोने वाले वाहनों को इस प्रतिबंध से राहत दी गई है। हालांकि निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों पर अब भी रोक बनी हुई है।
हवा अभी भी खतरे में
हालात यह हैं कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली की हवा में बड़े सुधार की उम्मीद कम है। वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। ऐसे में सरकार साफ कर चुकी है कि नियमों में ढील नहीं दी जाएगी।