दिल्ली की हवा एक बार फिर सांस लेना मुश्किल बना रही है। प्रदूषण का स्तर अचानक बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 700 के पार दर्ज होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए GRAP-3 लागू कर दिया है। धुंध, धुएं और ठंडी हवाओं के ठहराव ने राजधानी को गैस चैंबर जैसी स्थिति में पहुंचा दिया है।
प्रदूषण की आपात स्थिति और GRAP-3 का फैसला
दिल्ली में वायु गुणवत्ता के तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने तत्काल GRAP-3 लागू करने का निर्णय लिया। सुबह के समय घनी धुंध और जहरीली हवा ने साफ संकेत दे दिए थे कि हालात नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार यदि सख्त पाबंदियां नहीं लगाई जातीं, तो स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता था।
GRAP-3 के तहत क्या-क्या प्रतिबंध लगे
GRAP-3 के लागू होते ही गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगा दी गई है। ईंट भट्टे, स्टोन क्रशर, खनन गतिविधियां और डीजल जेनरेटर के उपयोग पर सख्ती की गई है। इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही सीमित की गई है और उद्योगों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई है, ताकि उत्सर्जन को न्यूनतम रखा जा सके।
किन गतिविधियों को मिली सीमित राहत
हालांकि, आवश्यक सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को शर्तों के साथ छूट दी गई है। मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, हाईवे, अस्पताल और स्वच्छता से जुड़े कार्य जारी रहेंगे। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक कक्षाओं के लिए हाइब्रिड पढ़ाई को बढ़ावा दिया गया है और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की अपील की गई है।
जमीनी हालात: धुंध में डूबी राजधानी
शनिवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही। सड़कों पर चलना और वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया। AQI 400 से ऊपर पहुंचने वाले क्षेत्रों की संख्या लगातार बढ़ी, जिससे आम लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
प्रदूषण के पीछे मौसम और मानवीय कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक पराली का धुआं, कम हवा की रफ्तार, बढ़ता ट्रैफिक और निर्माण कार्य प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही बदलते मौसम पैटर्न और जलवायु परिवर्तन ने हालात को और जटिल बना दिया है। ठंड के मौसम में हवा का ठहराव प्रदूषित कणों को जमीन के पास रोक देता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।