
दिवाली में पटाखों के धुंए और धीरे- धीरे बढ़ रही सर्दी के चलते दिल्ली में लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है. इसके साथ धूल, मिट्टी और वाहनों का धुंआ भा इस प्रदूषण में लगातार इजाफा कर रहे हैं. फिलहाल दिल्ली सरकार की तरफ से कुछ समय के लिए इस समस्या से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश का उपाय ढूंढ निकाला.
कृत्रिम बारिश को लेकर सारी तैयारियां पूरी
वहीं दिल्ली में कृत्रिम तरीके से बारिश कराए जाने की पूरी तैयारियां कर ली गई है. जिसको लेकर वातावरण के हालात और आसमान में ठीक-ठाक बादल होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को ही कृत्रिम बारिश हो सकती है. जबकि पहले इसको लेकर 29 तारीख यानी बुधवार का दिन तय किया गया था. वैज्ञानिक तौर पर इस पूरी प्रक्रिया को क्लाउड सीडिंग कहा जाता है. इसको लेकर बड़ा अपडेट यह है कि सेसना एयरक्राफ्ट द्वारा कानपुर से मेरठ के लिए उड़ान भर दी गई है. जहां से सेसना एयरक्राफ्ट मेरठ पहुंचेगा. सूत्रों की माने तो मंगलवार को क्लाउड सीडिंग होने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है.
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क्लाउड सीडिंग का बार-बार इस्तेमाल खतरनाक
एनवायरमेंट एक्सपर्ट मनु सिंह का क्लाउड सीडिंग को लेकर कहना है कि यह परमानेंट समाधान नहीं हो सकता है. बल्कि यह टेंपरेरी समाधान हो सकता है क्योंकि अगर हम बार-बार क्लाउड सीडिंग का इस्तेमाल करेंगे तो प्रकृति के पैटर्न में भी बदलाव हो जाएंगे और इसका असर कृषि, स्वास्थ्य और मिट्टी पर भी पड़ेगा. दरअसल क्लाउड सीडिंग में होने वाली बारिश ठीक वैसे ही काम करती है जैसे नेचुरल बारिश काम करती है लेकिन इसका बार-बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. इस वजह से प्रदूषण को कम करने के लिए परमानेंट समाधानों पर काम किया जाना चाहिए क्योंकि क्लाउड सीडिंग एक टेंपरेरी समाधान है और इसका बार-बार इस्तेमाल किया जाना खतरनाक साबित हो सकता है.