Delhi Artificial Rain Plan : दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एक बार फिर कृत्रिम बारिश का सहारा लेने की तैयारी की है। खास बात यह है कि सरकार दिवाली और छठ पूजा के बाद जरूरत पड़ने पर यह कदम उठा सकती है। इसके लिए पिछले 15 दिनों में दो परीक्षण भी किए जा चुके हैं।
दिवाली और छठ के बाद आसमान से होगी बारिश
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। सरकार की ओर से कई तरह की पाबंदियां लगाने के बाद भी हवा की गुणवत्ता में खास सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में अधिकारियों ने कृत्रिम बारिश का विकल्प तैयार रखा है। योजना के मुताबिक, अगर दिवाली और छठ पूजा के बाद भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना रहता है तो कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है। इसका मकसद हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के छोटे कणों को बारिश के जरिए नीचे लाना है। हालांकि, बारिश कराने का फैसला मौसम की स्थिति और बादलों में नमी को देखकर ही लिया जाएगा।
दिल्ली में हो चुके हैं कृत्रिम बारिश के दो परीक्षण
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली में पिछले 15 दिनों के दौरान दो ट्रायल किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक परीक्षण दिल्ली हवाई अड्डे के पास किया गया। ये परीक्षण करीब 30 हजार मीटर की ऊंचाई पर किए गए। पिछले साल हुए प्रयोग में करीब 10 हजार मीटर की ऊंचाई पर क्लाउड सीडिंग की गई थी। इन नए परीक्षणों का मकसद तकनीक और उसकी तैयारी को समझना है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रदूषण के बीच इसका इस्तेमाल किया जा सके।
पिछले साल भी हुई थी बारिश कराने की कोशिश
दिल्ली में पिछले साल भी प्रदूषण कम करने के लिए कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया गया था। इस काम में आईआईटी कानपुर की टीम ने मदद की थी। 28 अक्टूबर 2025 को विमान की मदद से बादलों में सिल्वर आयोडाइड और नमक के मिश्रण को छोड़ा गया था। इसके लिए बुराड़ी, मयूर विहार और करोल बाग जैसे इलाकों को चुना गया था। हालांकि, बादलों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो पाई। इस बार सरकार पहले से तैयारी कर रही है, ताकि सही मौसम मिलने पर प्रयोग किया जा सके।
463 तक पहुंचा दिल्ली का एक्यूआई, कब मिलेगी राहत
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ इलाकों में एक्यूआई 463 तक पहुंच गया। जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, आईटीओ और लाजपत नगर जैसे इलाकों में हवा की हालत बेहद खराब रही। नोएडा में भी एक्यूआई 456 और ग्रेटर नोएडा में 426 दर्ज किया गया। सरकार ने वाहनों पर पाबंदी, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और कार्यालयों में घर से काम करने जैसे कदम भी उठाए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा। ऐसे में कृत्रिम बारिश से कुछ समय के लिए राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन यह प्रदूषण का स्थायी इलाज नहीं है। इसके लिए गाड़ियों के धुएं, फैक्ट्रियों और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना भी जरूरी होगा।